
18000 फीट पर लड़ी गई थी भारत की ये जंग, जानिए कितने जवान हुए थे शहीद
नई दिल्ली। भारत के सैन्य इतिहास में कारगिल युद्ध (1999) वीरता, साहस और अदम्य संकल्प का प्रतीक माना जाता है। यह युद्ध दुनिया के सबसे कठिन पर्वतीय युद्धों में से एक था, जिसमें भारतीय सैनिकों ने 15,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर दुश्मन से मुकाबला किया। बेहद कम ऑक्सीजन, कड़ाके की ठंड और दुर्गम पहाड़ों के बीच लड़ी गई इस जंग में भारतीय सेना ने असाधारण पराक्रम का परिचय दिया।
साल 1999 में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों और पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा (LoC) के भारतीय क्षेत्र में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था। इन रणनीतिक चोटियों को वापस लेने के लिए भारत ने ऑपरेशन विजय शुरू किया। भारतीय सेना और वायुसेना ने संयुक्त अभियान चलाकर एक-एक चोटी पर कब्जा वापस हासिल किया। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कारगिल युद्ध में भारत ने बड़ी कीमत चुकाई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए, जबकि 1,300 से अधिक जवान घायल हुए। इन वीर सैनिकों के बलिदान की बदौलत भारत ने सभी प्रमुख चोटियों पर फिर से तिरंगा फहराया और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
इस युद्ध में कई सैनिकों ने असाधारण वीरता दिखाई। कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव और राइफलमैन संजय कुमार को उनके अद्वितीय साहस के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इनकी वीरगाथाएं आज भी देशवासियों को प्रेरित करती हैं।
हालांकि, दुनिया का सबसे ऊंचा सक्रिय युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर माना जाता है, जहां भारतीय सेना 18,000 से 22,000 फीट तक की ऊंचाई पर तैनात रहती है। वहां 1984 से चल रहा ऑपरेशन मेघदूत भारतीय सैन्य इतिहास का सबसे लंबा सैन्य अभियान है।
हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन 527 अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। कारगिल युद्ध भारतीय सेना के अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अमर प्रतीक बन चुका है।

