
तेज प्रताप यादव पर कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं? दोष सिद्ध होने पर कितनी हो सकती है सजा
पटना। बिहार बंद के दौरान हुए प्रदर्शन और पुलिस के साथ कथित हिंसक झड़प के मामले में जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेज प्रताप यादव के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एफआईआर में तेज प्रताप यादव पर प्रदर्शन के दौरान भीड़ का नेतृत्व करने, पुलिस पर हमले, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाने और थानाध्यक्ष सहित पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। बाद में बीएनएस की धारा 109 (हत्या के प्रयास) भी जोड़ी गई है।
किन-किन आरोपों का जिक्र है?
एफआईआर में जिन प्रमुख आरोपों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- हत्या के प्रयास (BNS धारा 109)
- दंगा और हिंसक भीड़ का हिस्सा बनने के आरोप
- सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकना
- पुलिसकर्मियों पर हमला कर चोट पहुंचाना
- सरकारी संपत्ति और पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाना
- कानून-व्यवस्था भंग करने से जुड़े अन्य आरोप
कितनी हो सकती है सजा?
यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग सजा का प्रावधान है।
- हत्या के प्रयास (BNS धारा 109): आजीवन कारावास या अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा, साथ में जुर्माना भी हो सकता है।
- सरकारी कर्मचारी पर हमला, दंगा, सरकारी कार्य में बाधा और सरकारी संपत्ति को नुकसान जैसी धाराओं में भी अपराध की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग अवधि की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। अंतिम सजा इस बात पर निर्भर करेगी कि अदालत किन आरोपों को साबित मानती है।
अभी क्या है कानूनी स्थिति?
फिलहाल यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। एफआईआर दर्ज होना या आरोप लगना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता। अंतिम निर्णय साक्ष्यों, पुलिस जांच और अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा। तेज प्रताप यादव की ओर से भी पुलिस कार्रवाई और एफआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

