चीन, बारिश या ब्रह्मपुत्र; हर साल बाढ़ में डूबते असम का जिम्मेदार कौन?

चीन, बारिश या ब्रह्मपुत्र; हर साल बाढ़ में डूबते असम का जिम्मेदार कौन?

गुवाहाटी। हर साल मानसून के दौरान असम भीषण बाढ़ की चपेट में आ जाता है। लाखों लोग प्रभावित होते हैं, हजारों हेक्टेयर फसलें बर्बाद होती हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या असम की बाढ़ के लिए केवल चीन जिम्मेदार है, या इसकी वजह ब्रह्मपुत्र नदी और भारी बारिश है? विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब किसी एक कारण में नहीं, बल्कि कई प्राकृतिक और मानवीय कारकों के मेल में छिपा है।

ब्रह्मपुत्र नदी का विशाल जलग्रहण क्षेत्र

ब्रह्मपुत्र दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अधिक जल प्रवाह वाली नदियों में से एक है। इसका उद्गम तिब्बत (चीन) में होता है, जहां इसे यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है। इसके बाद यह अरुणाचल प्रदेश होते हुए असम में प्रवेश करती है। नदी का विशाल जलग्रहण क्षेत्र और तेज प्रवाह मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ा देता है।

भारी मानसूनी बारिश सबसे बड़ा कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि असम में हर साल आने वाली बाढ़ का सबसे प्रमुख कारण स्थानीय और ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली भारी वर्षा है। मानसून के दौरान असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, भूटान और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश होती है, जिससे ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है।

क्या चीन जिम्मेदार है?

समय-समय पर यह दावा किया जाता है कि चीन द्वारा तिब्बत क्षेत्र में बनाए जा रहे बांध या जल परियोजनाएं असम की बाढ़ का कारण हैं। हालांकि, अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक या आधिकारिक प्रमाण नहीं है, जो यह साबित करता हो कि हर साल असम में आने वाली बाढ़ का मुख्य कारण चीन से छोड़ा गया पानी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का प्रमुख कारण मानसूनी वर्षा और नदी तंत्र की प्राकृतिक स्थिति है।

कटाव और गाद की बड़ी समस्या

ब्रह्मपुत्र अपने साथ बड़ी मात्रा में गाद (सिल्ट) लाती है। इससे नदी का तल कई जगह ऊंचा हो जाता है और पानी की वहन क्षमता घट जाती है। नतीजतन, बारिश के दौरान नदी तेजी से किनारे तोड़कर आसपास के इलाकों में फैल जाती है। नदी किनारे होने वाला कटाव भी असम की बड़ी समस्याओं में शामिल है।

मानवीय कारण भी जिम्मेदार

विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ की गंभीरता बढ़ाने में कुछ मानवीय कारण भी भूमिका निभाते हैं। इनमें बाढ़ के मैदानों में अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई, जल निकासी व्यवस्था की कमी और नदी तटों पर अतिक्रमण शामिल हैं। इन कारणों से बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाता और कई इलाके लंबे समय तक जलमग्न रहते हैं।

समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि असम में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान केवल तटबंध बनाने से संभव नहीं है। इसके लिए नदी प्रबंधन, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, कटाव रोकने के उपाय, वैज्ञानिक तरीके से गाद प्रबंधन, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण जैसे कदमों की आवश्यकता है। साथ ही, भारत, भूटान और चीन जैसे ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र वाले देशों के बीच जल संबंधी आंकड़ों का समय पर आदान-प्रदान भी बाढ़ प्रबंधन में मददगार हो सकता है।

कुल मिलाकर, असम की वार्षिक बाढ़ के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। यह प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों, भारी मानसूनी वर्षा, ब्रह्मपुत्र की विशेषताओं, गाद जमाव और कुछ मानवीय कारणों का संयुक्त परिणाम है। यही वजह है कि हर साल मानसून के दौरान राज्य को इस चुनौती का सामना करना पड़ता है।

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)