पीठ दर्द से लेकर मामूली चोट में फ्रैक्चर तक! पुरुषों की हड्डियों को चुपचाप खोखला बना रही यह खतरनाक बीमारी

पीठ दर्द से लेकर मामूली चोट में फ्रैक्चर तक! पुरुषों की हड्डियों को चुपचाप खोखला बना रही यह खतरनाक बीमारी

आमतौर पर माना जाता है कि हड्डियों के कमजोर होने की समस्या सिर्फ महिलाओं में होती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार पुरुष भी ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे अपना घनत्व (Bone Density) खोने लगती हैं और अंदर से कमजोर व खोखली हो जाती हैं। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए कई लोगों को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता।

क्या है ऑस्टियोपोरोसिस?

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और उनकी मजबूती घटने लगती है। नतीजतन, मामूली गिरने, ठोकर लगने या हल्के झटके से भी फ्रैक्चर हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में इसका खतरा बढ़ जाता है, हालांकि कुछ मामलों में यह कम उम्र में भी हो सकता है।

पुरुषों में हड्डियां कमजोर होने के कारण

पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं—

  • बढ़ती उम्र के साथ बोन डेंसिटी का कम होना।
  • शरीर में विटामिन D और कैल्शियम की कमी।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि या व्यायाम का अभाव।
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन।
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड जैसी दवाओं का उपयोग।
  • हार्मोन संबंधी समस्याएं, जैसे टेस्टोस्टेरोन का कम स्तर।
  • किडनी, लिवर या थायरॉयड से जुड़ी कुछ बीमारियां।

शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन समय के साथ ये संकेत सामने आ सकते हैं—

  • लगातार पीठ या कमर में दर्द।
  • मामूली चोट या गिरने पर भी हड्डी टूट जाना।
  • लंबाई धीरे-धीरे कम होना।
  • रीढ़ का झुकना या शरीर का आगे की ओर झुक जाना।
  • कलाई, कूल्हे या रीढ़ की हड्डी में बार-बार फ्रैक्चर होना।
  • लंबे समय तक खड़े रहने या चलने में परेशानी।

कैसे करें बचाव?

हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ ये उपाय अपनाने की सलाह देते हैं—

  • रोजाना कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार लें।
  • सुबह की धूप में 15–20 मिनट जरूर बिताएं।
  • नियमित रूप से वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज, वॉक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
  • धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  • 50 वर्ष की उम्र के बाद या जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से बोन डेंसिटी (DEXA) टेस्ट कराएं।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि आपको लंबे समय से पीठ दर्द, बार-बार फ्रैक्चर, लंबाई कम होने या हड्डियों में लगातार कमजोरी महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। समय पर जांच और इलाज से ऑस्टियोपोरोसिस की प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है और फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सकता है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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