35 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियां क्यों होने लगती हैं कमजोर? जानें कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

35 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियां क्यों होने लगती हैं कमजोर? जानें कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं और महिलाओं में इसका असर सबसे पहले हड्डियों पर दिखाई देने लगता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 35 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों का घनत्व (Bone Density) धीरे-धीरे कम होने लगता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जिससे मामूली चोट में भी हड्डियां टूटने का जोखिम रहता है।

35 के बाद हड्डियां कमजोर क्यों होने लगती हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, लगभग 30–35 वर्ष की उम्र तक हड्डियां अपनी अधिकतम मजबूती पर होती हैं। इसके बाद शरीर में नई हड्डी बनने की गति धीमी हो जाती है, जबकि पुरानी हड्डियों का क्षय जारी रहता है। महिलाओं में यह प्रक्रिया एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में बदलाव के कारण अधिक तेज हो सकती है, खासकर रजोनिवृत्ति (Menopause) के आसपास।

इसके अलावा इन कारणों से भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं—

  • कैल्शियम और विटामिन D की कमी।
  • नियमित व्यायाम न करना।
  • धूप में कम समय बिताना।
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन।
  • लंबे समय तक कुछ दवाओं, जैसे स्टेरॉयड, का उपयोग।
  • परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास।

हड्डियां कमजोर होने के शुरुआती लक्षण

शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन समय के साथ ये संकेत दिखाई दे सकते हैं—

  • पीठ, कमर या जोड़ों में लगातार दर्द।
  • छोटी चोट में भी हड्डी टूट जाना।
  • लंबाई का धीरे-धीरे कम होना।
  • झुककर चलना या रीढ़ का मुड़ना।
  • बार-बार फ्रैक्चर होना।
  • लंबे समय तक खड़े रहने या चलने में परेशानी।

कैसे रखें हड्डियों को मजबूत?

विशेषज्ञ हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं।

  • कैल्शियम से भरपूर आहार लें, जैसे दूध, दही, पनीर, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियां।
  • पर्याप्त मात्रा में विटामिन D लें और नियमित रूप से सुबह की धूप में समय बिताएं।
  • रोजाना वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज, तेज चाल से चलना, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
  • शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  • रजोनिवृत्ति के बाद या जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से बोन डेंसिटी (DEXA) टेस्ट कराएं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि 35 वर्ष की उम्र के बाद लगातार हड्डियों या कमर में दर्द, बार-बार फ्रैक्चर, लंबाई कम होना या ऑस्टियोपोरोसिस का पारिवारिक इतिहास हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बोन डेंसिटी टेस्ट और अन्य जांच के आधार पर उचित इलाज और सप्लीमेंट्स की सलाह दी जा सकती है।

ध्यान दें: हड्डियों का कमजोर होना उम्र का सामान्य हिस्सा हो सकता है, लेकिन सही खानपान, नियमित व्यायाम और समय पर जांच से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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