
UPI Payment Charges पर मायावती सरकार के साथ या खिलाफ? BSP चीफ ने लिया स्टैंड
लखनऊ। UPI पेमेंट पर प्रस्तावित नए शुल्क को लेकर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। मायावती ने कहा कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब उस पर शुल्क लगाने की व्यवस्था से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। उन्होंने इस व्यवस्था को जनता से अतिरिक्त वसूली से जोड़ते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।
मायावती ने कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले से गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य आर्थिक परेशानियों से जूझ रही है। ऐसे में सरकार की नीतियों का उद्देश्य जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय राहत और कल्याण पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम लोगों की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है, तो ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।
क्या है UPI का नया चार्ज?
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यानी Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है। वहीं, Person-to-Person (P2P) UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों और अन्य भागीदारों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
मायावती ने क्यों जताई आपत्ति?
मायावती का कहना है कि भले ही सरकार इसे टैक्स न माने, लेकिन यदि व्यापारी पर अतिरिक्त लागत आती है तो उसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका बनी रहती है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए और कहा कि जनता की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए नीतियां अधिक कल्याणकारी होनी चाहिए।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि मायावती का बयान नए UPI शुल्क ढांचे के विरोध में है, जबकि केंद्र सरकार इस व्यवस्था को UPI सिस्टम की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता से जोड़ रही है। सरकार का कहना है कि P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा और छोटे व्यापारियों के बड़े हिस्से पर भी MDR लागू नहीं होगा।
सरकार ने ग्राहकों को लेकर क्या कहा?
केंद्र सरकार ने कहा है कि ग्राहक से सीधे UPI ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा। साथ ही बैंकों और संबंधित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। सरकार इस बात की निगरानी भी करने की तैयारी में है कि व्यापारी ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क के नाम पर वसूली न करें।
UPI को लेकर सियासी बहस तेज
UPI भारत में डिजिटल भुगतान का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क व्यवस्था में बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। मायावती ने इस मुद्दे को सीधे आम जनता की आर्थिक स्थिति से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग जैसा रुख अपनाया है।
दूसरी तरफ सरकार का तर्क है कि UPI के संचालन, सुरक्षा, तकनीकी ढांचे और विस्तार में लगातार खर्च होता है और लंबे समय तक पूरी व्यवस्था को सब्सिडी के सहारे चलाना टिकाऊ मॉडल नहीं हो सकता। नए ढांचे का उद्देश्य इसी भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना बताया गया है।
यानी UPI चार्ज के मुद्दे पर मायावती का रुख केंद्र सरकार के फैसले के समर्थन में नहीं, बल्कि इसके खिलाफ है। हालांकि नई व्यवस्था का वास्तविक असर ग्राहकों और व्यापारियों पर कितना पड़ता है, यह 15 अक्टूबर के बाद इसके लागू होने और निगरानी के परिणामों से ज्यादा स्पष्ट होगा।

