
कूनो में गूंजी चीतों की नई किलकारी, 4 शावकों के जन्म से भारत में 56 हुआ कुनबा
मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने 18 सितंबर 2026 को चार नन्हे शावकों को जन्म दिया है। इन चार नए शावकों के जन्म के साथ ही देश में जीवित चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
यह खबर ऐसे समय आई है जब भारत में प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे हुए हैं। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों के साथ भारत में चीता पुनर्स्थापना की शुरुआत हुई थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों से भी चीते भारत लाए गए। अब भारत में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ यहां जन्मी नई पीढ़ी भी लगातार सामने आ रही है।
KGP12 ने दूसरी बार दिया शावकों को जन्म
KGP12 दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी की बेटी है और भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी की मादा चीताओं में शामिल है। इससे पहले इसी साल अप्रैल में KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया था। हालांकि वे शावक बाद में जीवित नहीं रह सके थे। अब करीब चार महीने बाद KGP12 ने दोबारा चार शावकों को जन्म दिया है।
कूनो प्रबंधन के मुताबिक, इस बार मां और चारों शावकों को निगरानी में रखा गया है। वन विभाग की टीम उनकी गतिविधियों पर दूर से नजर रख रही है, ताकि मां और बच्चों को किसी तरह का अनावश्यक व्यवधान न हो।
भारत में जन्मे चीतों की संख्या भी बढ़ी
चार नए शावकों के जन्म के बाद भारत में जन्मे चीतों की संख्या 36 हो गई है। यानी देश में मौजूद 56 जीवित चीतों में एक बड़ी संख्या ऐसी है, जो भारत की धरती पर ही पैदा हुई है। इसे चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम के उस चरण के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें विदेशी चीतों को भारत में बसाने के साथ उनके प्राकृतिक प्रजनन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
फिलहाल चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 53 हो गई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में तीन चीते मौजूद हैं। इस तरह मध्य प्रदेश में कुल 56 जीवित चीते बताए गए हैं।
8 चीतों से शुरू हुआ सफर 56 तक पहुंचा
भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। पहली खेप में नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे। फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। इसके बाद 2026 में बोत्सवाना से भी नौ चीते भारत पहुंचे। इस दौरान भारत में चीतों का प्रजनन भी हुआ और अब नई पीढ़ी के शावक सामने आ रहे हैं।
कूनो में चार नए शावकों का जन्म इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि यह भारत में जन्मी मादा चीता के प्राकृतिक प्रजनन का एक और उदाहरण है। इससे संकेत मिलता है कि परियोजना अब केवल चीतों को भारत लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में उनके प्रजनन और नई पीढ़ी के संरक्षण पर भी आगे बढ़ रही है।
कूनो में बढ़ रहा चीता परिवार
कूनो नेशनल पार्क पिछले चार वर्षों में भारत के चीता संरक्षण अभियान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां लगातार चीतों के प्रजनन और उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। वन विभाग, पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीमें चीतों की गतिविधियों, स्वास्थ्य और आवास पर नजर रखती हैं।
चार नए शावकों के जन्म के साथ एक बार फिर कूनो में चीतों की नई पीढ़ी की दस्तक हुई है। अब वन विभाग के सामने इन नन्हे शावकों को सुरक्षित रखने और उनके स्वस्थ विकास की निगरानी की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में इनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाएगी।
कूनो से आई यह खबर भारत में चीता संरक्षण की यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ती है। चार साल पहले आठ चीतों के साथ शुरू हुआ सफर अब 56 जीवित चीतों तक पहुंच चुका है और भारत में जन्मी नई पीढ़ी इस अभियान के अगले चरण को आगे बढ़ा रही है।

