Share Market Crash: सेंसेक्स 650 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,200 के नीचे फिसला, जानें बाजार में क्यों मची बिकवाली

Share Market Crash: सेंसेक्स 650 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,200 के नीचे फिसला, जानें बाजार में क्यों मची बिकवाली

मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 650 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 फिसलकर 24,200 के नीचे पहुंच गया। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल और वित्तीय शेयरों में भारी दबाव के चलते बाजार लाल निशान में बंद हुआ। निवेशकों की संपत्ति में भी हजारों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर बने नकारात्मक माहौल ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी अटकलों और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया।

कारोबार के दौरान बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली। निजी बैंकों के साथ-साथ आईटी कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। मेटल और ऑटो सेक्टर में भी मुनाफावसूली के कारण तेज बिकवाली हुई। हालांकि कुछ चुनिंदा डिफेंस और एफएमसीजी शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की, लेकिन व्यापक बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक संभल नहीं सके।

विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने इस गिरावट को और तेज कर दिया। इसके साथ ही रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक माहौल में सुधार होता है और घरेलू कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है।

फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराहट में फैसले लेने के बजाय मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों पर ध्यान दें और लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनाएं। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना के बीच विशेषज्ञ संतुलित निवेश और जोखिम प्रबंधन पर जोर दे रहे हैं।

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)