SC/ST एक्ट की धाराओं को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

SC/ST एक्ट की धाराओं को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से कानून के दुरुपयोग और आरोपियों के अधिकारों को लेकर दलीलें दी गई थीं।

याचिकाकर्ता बृजभूषण सैनी की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि बिना प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी की व्यवस्था से कानून के दुरुपयोग की आशंका रहती है। उन्होंने अग्रिम जमानत पर धारा 18 के तहत लगी पाबंदी का भी मुद्दा उठाया।

कोर्ट ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को उत्पीड़न से बचाने के लिए कानून में पर्याप्त उपाय मौजूद हैं। पीठ ने यह भी ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2020 में इस कानून में किए गए बदलावों को बरकरार रख चुका है और करीब छह साल बाद उस व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने का पर्याप्त आधार नजर नहीं आता।

मुआवजे के प्रावधान पर भी बहस

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने शिकायतकर्ता को मुकदमे की शुरुआत में मुआवजा दिए जाने के प्रावधान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने राज्यसभा में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए मुआवजे की राशि का मुद्दा उठाया।

इस पर पीठ के सदस्य जस्टिस जोयमाल्या बागची ने इस दलील पर आपत्ति जताई और इसे ‘क्रूर’ बताया।

2018 में भी उठा था मामला

SC/ST एक्ट के प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले भी बहस हो चुकी है। वर्ष 2018 में सुभाष काशीनाथ महाजन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और FIR से पहले कुछ सुरक्षा उपायों की बात कही थी। इसमें कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी से पहले मंजूरी और DSP स्तर के अधिकारी से प्रारंभिक जांच जैसे उपाय शामिल थे।

इस फैसले के बाद व्यापक विरोध हुआ। इसके बाद संसद ने कानून में संशोधन करते हुए धारा 18A जोड़ी। इसमें स्पष्ट किया गया कि FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच जरूरी नहीं होगी और गिरफ्तारी के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।

वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने Prathvi Raj Chauhan v. Union of India मामले में संशोधित प्रावधानों को बरकरार रखा था। मौजूदा याचिका में इन्हीं प्रावधानों को दोबारा चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

 

CATEGORIES
TAGS
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)