GLP-1 Drugs Obesity Treatment: GLP-1 दवाओं से बदल रहा मोटापे का इलाज, क्या अब सर्जरी की जरूरत कम होगी?

GLP-1 Drugs Obesity Treatment: GLP-1 दवाओं से बदल रहा मोटापे का इलाज, क्या अब सर्जरी की जरूरत कम होगी?

नई दिल्ली: मोटापा अब सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं, बल्कि एक जटिल और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य स्थिति के रूप में देखा जाता है। इसके इलाज में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खासकर GLP-1 आधारित दवाओं और उनसे जुड़े नए उपचारों ने मोटापे के मेडिकल मैनेजमेंट को नई दिशा दी है।

Semaglutide और tirzepatide जैसी दवाओं ने कई क्लिनिकल ट्रायल में महत्वपूर्ण वजन घटाने के परिणाम दिखाए हैं। 2025 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में मोटापे से ग्रस्त लेकिन डायबिटीज न होने वाले लोगों में tirzepatide ने 72 सप्ताह में औसतन करीब 20.2% वजन घटाया, जबकि semaglutide के साथ यह आंकड़ा करीब 13.7% रहा।

लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या इन दवाओं की सफलता से भविष्य में bariatric surgery यानी वजन घटाने वाली सर्जरी की जरूरत कम हो जाएगी?

GLP-1 दवाएं कैसे करती हैं काम?

GLP-1 receptor agonists शरीर में ऐसे हार्मोनल संकेतों की नकल करती हैं जो भूख और भोजन के बाद शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं। इनका एक प्रभाव पेट के खाली होने की गति को धीमा करना और दिमाग में तृप्ति यानी पेट भरा होने का एहसास बढ़ाना है। इससे व्यक्ति कम भोजन कर सकता है और समय के साथ वजन कम हो सकता है।

यही वजह है कि इन दवाओं को मोटापे के इलाज में एक महत्वपूर्ण मेडिकल विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, इनके इस्तेमाल से जुड़े सवाल भी हैं, जिनमें लंबे समय तक उपचार जारी रखने की जरूरत और दवा बंद करने के बाद वजन वापस बढ़ने की संभावना शामिल है।

क्या सर्जरी की जरूरत अब कम हो सकती है?

GLP-1 दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच bariatric surgery की भूमिका पर चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ये दवाएं सर्जरी की जगह पूरी तरह ले लेंगी।

2026 में American Society for Metabolic and Bariatric Surgery की बैठक में प्रस्तुत एक अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों ने सर्जरी से पहले GLP-1 दवाएं लीं, उन्होंने दवाओं से पहले करीब 8% वजन कम किया। इसके बाद जिन मरीजों ने gastric bypass कराया, उनमें कुल वजन घटाव 25% से अधिक और sleeve gastrectomy कराने वालों में करीब 20% तक पहुंचा। अध्ययन में यह भी पाया गया कि पहले GLP-1 लेने से बाद की सर्जरी की प्रभावशीलता खत्म नहीं हुई।

इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में दवा और सर्जरी को एक-दूसरे के विकल्प के बजाय जरूरत के मुताबिक उपचार के अलग-अलग हिस्सों के रूप में देखा जा सकता है।

किन मरीजों में सर्जरी अभी भी अहम?

गंभीर मोटापे वाले कुछ मरीजों में bariatric surgery अभी भी सबसे प्रभावी उपचार विकल्पों में शामिल है। American Society for Metabolic and Bariatric Surgery के अनुसार, सर्जरी से लंबे समय तक वजन घटाने और मोटापे से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार मिल सकता है।

हर मरीज का मामला अलग होता है। किसी व्यक्ति के लिए दवा पर्याप्त हो सकती है, जबकि किसी दूसरे मरीज को अधिक प्रभावी या स्थायी उपचार के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

इसीलिए यह फैसला केवल वजन या BMI देखकर नहीं किया जाता। व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति, मोटापे से जुड़ी अन्य समस्याएं, उपचार की प्रतिक्रिया और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

GLP-1 दवाओं की अपनी चुनौतियां भी हैं

इन दवाओं को लेकर उत्साह के साथ सावधानी भी जरूरी है। क्लिनिकल अध्ययनों में इनके सामान्य दुष्प्रभावों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी पाचन तंत्र से जुड़े लक्षण सामने आए हैं। कुछ शोधों में मांसपेशियों और हड्डियों के द्रव्यमान में कमी जैसे संभावित प्रभावों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लंबे समय तक दवा लेने और दवा बंद करने के बाद वजन दोबारा बढ़ने जैसे मुद्दों पर भी अभी अध्ययन जारी हैं।

इसलिए इन्हें सामान्य ‘वजन घटाने की दवा’ समझकर अपने स्तर पर इस्तेमाल करना उचित नहीं है। किसी भी प्रिस्क्रिप्शन उपचार का फैसला योग्य डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए।

आने वाले समय में बदल सकता है मोटापे का इलाज

GLP-1 आधारित उपचारों ने मोटापे के इलाज में एक बड़ा बदलाव जरूर पैदा किया है। 2026 की एक समीक्षा में भी इन दवाओं को मोटापे के मेडिकल उपचार में महत्वपूर्ण प्रगति बताया गया है, लेकिन साथ ही लंबे समय तक उपचार, वजन दोबारा बढ़ने और संभावित दुष्प्रभावों जैसे सवालों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

दूसरी ओर, वास्तविक दुनिया के आंकड़ों में GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी दिखाई दे रही है, जबकि bariatric surgery की संख्या में उतनी तेजी नहीं आई। इसके बावजूद गंभीर मोटापे से जूझ रहे अधिकांश लोगों को अभी भी कोई औपचारिक उपचार नहीं मिल रहा है।

तो क्या सर्जरी खत्म हो जाएगी?

नहीं। मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि GLP-1 दवाएं bariatric surgery को पूरी तरह बदल देंगी।

असल बदलाव यह हो सकता है कि मोटापे का इलाज अब पहले से ज्यादा व्यक्तिगत और बहु-विकल्पीय हो। कुछ मरीजों में दवाएं प्रभावी हो सकती हैं, कुछ में सर्जरी की जरूरत बनी रह सकती है और कुछ मामलों में दोनों उपचार अलग-अलग चरणों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि ‘दवा या सर्जरी?’, बल्कि यह भी होगा कि ‘किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार, किस समय और कितनी अवधि तक सबसे उपयुक्त है?’

मोटापे के इलाज में GLP-1 दवाओं ने निश्चित रूप से एक नया अध्याय शुरू किया है, लेकिन सर्जरी की भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले वर्षों में बड़े और लंबे समय के अध्ययन यह तय करने में मदद करेंगे कि इन दोनों उपचारों का सबसे सुरक्षित और प्रभावी संयोजन क्या हो सकता है।

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