Ganga Dussehra 2026: मां गंगा के धरती पर अवतरण की पौराणिक कथा जानिए

Ganga Dussehra 2026: मां गंगा के धरती पर अवतरण की पौराणिक कथा जानिए

Ganga Dussehra का पर्व हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था। पौराणिक कथा के मुताबिक राजा सगर के 60 हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर आने के लिए तैयार हुईं, लेकिन उनके तेज प्रवाह को संभालना आसान नहीं था। तब भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया और फिर धीरे-धीरे गंगा धरती पर अवतरित हुईं।

माना जाता है कि मां गंगा के पृथ्वी पर आने से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। तभी से गंगा नदी को मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली माना जाता है। गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज जैसे तीर्थ स्थलों पर इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और भारतीय संस्कृति का प्रतीक भी है। मां गंगा को जीवनदायिनी माना जाता है, जो करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। इस दिन भक्त मां गंगा की आरती करते हैं, दीपदान करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी मां गंगा के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है, जिसके कारण यह पर्व पूरे देश में बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है।

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