
बच्चों के खाने पर FSSAI का नया फोकस, हाई शुगर-फैट और सॉल्ट वाले फूड पर सख्ती; स्कूलों के आसपास भी बढ़ी निगरानी
नई दिल्ली। बच्चों के खान-पान को लेकर देश में बहस तेज हो रही है। पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें फैट, शुगर या नमक की मात्रा अधिक होती है, उन्हें लेकर खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नियमों पर जोर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की ओर से HFSS यानी High Fat, Sugar and Salt खाद्य पदार्थों को लेकर जागरूकता और स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
हाल के दिनों में कई राज्यों ने भी बच्चों को HFSS खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए स्कूलों के आसपास कार्रवाई शुरू की है। महाराष्ट्र में स्कूल परिसरों के 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और मुफ्त वितरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। कर्नाटक ने भी स्कूल और कॉलेज परिसरों तथा उनके आसपास HFSS खाद्य पदार्थों को लेकर प्रतिबंध लागू किया है।
क्या है HFSS फूड?
HFSS का मतलब है High Fat, Sugar and Salt, यानी ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें वसा, चीनी या नमक की मात्रा अधिक हो सकती है।
इस श्रेणी को लेकर चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि बच्चों के बीच अत्यधिक मीठे, नमकीन और ज्यादा फैट वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और मार्केटिंग काफी व्यापक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थों की मार्केटिंग के प्रभाव से बचाने के लिए नीतियां बनाने की सिफारिश करता है।
FSSAI का फोकस क्या है?
FSSAI पहले से ही लोगों को नमक, चीनी और फैट का सेवन कम करने के लिए ‘Aaj Se Thoda Kam’ अभियान चला रहा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को अपने भोजन में नमक, चीनी और वसा की मात्रा धीरे-धीरे कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही खाद्य निर्माताओं को भी अपने उत्पादों में सुधार और इन पोषक तत्वों की मात्रा कम करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
FSSAI की सामग्री में सामान्य वयस्क आबादी के लिए कुल फैट, ट्रांस फैट, चीनी और नमक को सीमित रखने की सिफारिशें भी दी गई हैं। इन्हें बच्चों के लिए अलग से तय की गई नई सीमा समझना सही नहीं होगा।
बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
बच्चों की खान-पान की आदतें कम उम्र में विकसित होती हैं। अगर रोजाना के भोजन में अत्यधिक मीठे, नमकीन या ज्यादा फैट वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ जाए तो संतुलित आहार के लिए जरूरी दूसरे खाद्य पदार्थों की जगह कम हो सकती है।
इसी वजह से स्कूलों और बच्चों से जुड़े स्थानों पर ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और मार्केटिंग को नियंत्रित करने की कोशिशें बढ़ रही हैं।
स्कूलों के आसपास बढ़ी सख्ती
महाराष्ट्र FDA ने हाल ही में स्कूल परिसरों के 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य और पेय पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और मुफ्त वितरण पर प्रतिबंध लगाया है। इस दायरे में चिप्स, मीठे पेय और अन्य हाई फैट, शुगर और सॉल्ट वाले उत्पादों को लेकर कार्रवाई की जा सकती है।
कर्नाटक में भी स्कूल और कॉलेज परिसरों तथा 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री, मुफ्त वितरण, विज्ञापन और प्रचार पर रोक की घोषणा की गई है।
क्या हर पैकेज्ड फूड पर लगेगा प्रतिबंध?
नहीं। HFSS का मतलब यह नहीं है कि हर पैकेज्ड या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ प्रतिबंधित हो जाएगा।
किसी उत्पाद को HFSS श्रेणी में रखने के लिए उसके पोषण संबंधी प्रोफाइल और लागू नियमों को देखा जाता है। इसलिए केवल पैकेज्ड होने के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को ‘जंक फूड’ कहना सही नहीं होगा।
यही वजह है कि नियामकीय व्यवस्था में पोषण संबंधी मानकों और उत्पाद की वास्तविक संरचना को महत्व दिया जाता है।
कंपनियों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के सामने अब केवल स्वाद और कीमत ही नहीं, बल्कि पोषण संबंधी प्रोफाइल और जिम्मेदार मार्केटिंग भी महत्वपूर्ण मुद्दे बन रहे हैं।
FSSAI के अभियान में खाद्य निर्माताओं को भी उत्पादों में फैट, चीनी और नमक कम करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
माता-पिता के लिए क्या मायने रखता है?
बच्चों के भोजन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात संतुलन है। केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह अच्छा या खराब मानने के बजाय पूरे आहार को देखना जरूरी है।
पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना उपयोगी हो सकता है। बच्चों के रोजमर्रा के भोजन में विविधता बनाए रखना और अत्यधिक मीठे या नमकीन स्नैक्स पर निर्भरता कम रखना बेहतर खान-पान की दिशा में मदद कर सकता है।
क्या FSSAI ने बच्चों के लिए नई निश्चित लिमिट लागू कर दी?
यहां सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में “नई लिमिट” या “नया फॉर्मूला” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक FSSAI सामग्री मुख्य रूप से HFSS खाद्य पदार्थों की पहचान, जागरूकता और नमक-चीनी-वसा की मात्रा कम करने पर केंद्रित है।
इसलिए किसी विशेष उत्पाद के लिए नई कानूनी सीमा लागू होने का दावा करने से पहले संबंधित FSSAI अधिसूचना या नियम की पुष्टि करना जरूरी है।
निष्कर्ष
बच्चों के खान-पान को लेकर HFSS यानी हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थों पर ध्यान बढ़ रहा है। FSSAI लोगों को नमक, चीनी और फैट का सेवन कम करने के लिए जागरूक कर रहा है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने स्कूलों के आसपास HFSS खाद्य पदार्थों पर हाल में कड़े कदम उठाए हैं।
हालांकि, इसे फिलहाल पूरे देश में बच्चों के लिए लागू किसी एक नई “फूड लिमिट” के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। असली लक्ष्य बच्चों को बेहतर खान-पान का वातावरण देना और अत्यधिक HFSS खाद्य पदार्थों की उपलब्धता तथा मार्केटिंग को कम करना है।

