
होटल-रेस्टोरेंट के बाद सरकारी कैंटीन की बारी! स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, इंदिरा कैंटीन और सेंट्रलाइज्ड किचन में जांच
बेंगलुरु। शहर में खाद्य सुरक्षा और खाने की गुणवत्ता को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अब सरकारी कैंटीनों पर भी निगरानी बढ़ा दी है। 5-स्टार होटल और बड़े रेस्टोरेंट के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सरकारी इंदिरा कैंटीन और उनसे जुड़े सेंट्रलाइज्ड किचन का निरीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों की टीम ने कैंटीनों में साफ-सफाई, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, खाद्य सामग्री के भंडारण और फूड सेफ्टी मानकों के पालन की जांच की।
सरकार की ओर से यह कार्रवाई ऐसे समय में की जा रही है, जब शहर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और खराब या एक्सपायर्ड सामग्री के इस्तेमाल को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में लोगों को भोजन उपलब्ध कराने वाली सरकारी कैंटीनों में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसे सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता बताई जा रही है।
कई इलाकों की इंदिरा कैंटीन पहुंची टीम
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बेंगलुरु के अलग-अलग इलाकों में स्थित इंदिरा कैंटीनों का निरीक्षण किया। रिपोर्ट के मुताबिक बोम्मनहल्ली के गोत्तीगेरे, लिंगराजपुरम, केंगेरी और बोम्मासंद्रा इलाके में स्थित कैंटीनों को जांच के दायरे में लिया गया।
अधिकारियों ने कैंटीनों में भोजन बनाने की प्रक्रिया को देखा और यह जांचने की कोशिश की कि भोजन तैयार करने के दौरान आवश्यक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
सेंट्रलाइज्ड किचन पर भी नजर
जांच का दायरा केवल कैंटीन तक सीमित नहीं रहा। लिंगराजपुरम स्थित सेंट्रलाइज्ड इंदिरा कैंटीन किचन का भी निरीक्षण किया गया। यहां बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, इसलिए खाद्य सुरक्षा के लिहाज से इसकी जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों ने किचन की स्वच्छता, कच्चे खाद्य पदार्थों के रखरखाव, भोजन बनाने की व्यवस्था और सामग्री के स्टोरेज की स्थिति का जायजा लिया।
खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए गए
निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाने की जानकारी सामने आई है। इन नमूनों को जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया जा सके।
इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी देखा कि खाद्य सामग्री किस तरह रखी जा रही है और कहीं ऐसी सामग्री तो इस्तेमाल नहीं की जा रही जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध हो या जिसकी निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी हो।
पहले लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज कंपनियों पर हुई कार्रवाई
सरकारी कैंटीनों की जांच से पहले कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ी खाद्य लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज कंपनियों में भी निरीक्षण किया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर मांस, दूध, सॉस और सब्जियों जैसी खाद्य सामग्री को लेकर अधिकारियों ने जांच की। विभाग के मुताबिक कुछ सामग्री की एक्सपायरी नजदीक थी, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे।
करीब 70 किलो सॉस जब्त
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दो बड़ी खाद्य लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज कंपनियों में जांच के दौरान करीब 70 किलो सोया सॉस और अन्य सॉस मिले, जिन्हें विभाग ने जब्त किया।
इसके अलावा अधिकारियों ने मांस के पांच और अन्य खाद्य पदार्थों के 13 सैंपल लिए। करीब 10 लीटर पेय पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए लिए गए। इन सभी नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
आम लोगों की सेहत से जुड़ा मामला
इंदिरा कैंटीन जैसी सरकारी भोजन व्यवस्था में बड़ी संख्या में लोग खाना खाते हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है।
स्वास्थ्य विभाग का निरीक्षण इसी बात को सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि कम कीमत में भोजन उपलब्ध कराने वाली सरकारी कैंटीनों में भी खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण और लिए गए खाद्य नमूनों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों या संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
होटल और रेस्टोरेंट से आगे बढ़कर सरकारी कैंटीनों तथा बड़े किचन तक पहुंची खाद्य सुरक्षा जांच से साफ है कि विभाग अब भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर निगरानी का दायरा लगातार बढ़ा रहा है।
सरकारी कैंटीन में मिलने वाला भोजन आम लोगों के लिए सस्ता और सुलभ जरूर है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और विभाग की आगे की कार्रवाई पर रहेगी।

