नेताजी की अस्थियों को जापान से भारत लाने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र को नोटिस जारी

नेताजी की अस्थियों को जापान से भारत लाने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र को नोटिस जारी

नई दिल्ली। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथित पार्थिव अवशेषों को जापान से भारत वापस लाने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार के साथ विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया है।

नेताजी की बेटी ने दायर की याचिका

यह याचिका नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनिता बोस फाफ ने दाखिल की है। याचिका में मांग की गई है कि जापान के टोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर में रखे नेताजी से संबंधित अस्थियों को भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि लंबे समय से इन अवशेषों को जापान से भारत लाने को लेकर अंतिम और समयबद्ध फैसला नहीं हो सका है। अनिता बोस फाफ ने अदालत से भारत सरकार को इस संबंध में उचित कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की है।

रेनकोजी मंदिर में 1945 से रखी हैं अस्थियां

टोक्यो का रेनकोजी मंदिर लंबे समय से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी अस्थियों को लेकर चर्चा में रहा है। दावा किया जाता है कि अगस्त 1945 में विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु के बाद उनके पार्थिव अवशेषों को जापान ले जाया गया और बाद में रेनकोजी मंदिर में संरक्षित किया गया।

हालांकि, नेताजी की मृत्यु और जापान में रखी अस्थियों की पहचान को लेकर दशकों से विवाद और अलग-अलग मत रहे हैं। इसी वजह से इस मामले को केवल अस्थियों की वापसी का मुद्दा नहीं, बल्कि नेताजी की मृत्यु से जुड़े ऐतिहासिक सवालों से भी जोड़कर देखा जाता है।

बेटी ने कहा- अंतिम संस्कार करना चाहती हूं

अनिता बोस फाफ ने अपनी याचिका में कहा है कि वह नेताजी की बेटी और उनकी प्रत्यक्ष वंशज होने के नाते उनके अंतिम संस्कार को सम्मान और पूर्णता के साथ करना चाहती हैं।

उनकी मांग है कि भारत सरकार जापान के साथ आवश्यक बातचीत कर इन अवशेषों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू करे। वैकल्पिक रूप से उन्होंने सरकार से उन्हें स्वयं अवशेषों को भारत लाने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।

याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अनिता बोस फाफ की ओर से अदालत में पक्ष रखा। अब केंद्र सरकार को यह बताना होगा कि नेताजी से संबंधित इन अवशेषों को भारत वापस लाने के मामले में उसका क्या रुख है और इस दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

पहले भी उठती रही है भारत लाने की मांग

नेताजी के कथित अवशेषों को भारत वापस लाने की मांग कोई नई नहीं है। इससे पहले भी उनके परिवार और उनसे जुड़े लोगों की ओर से जापान में संरक्षित अवशेषों को भारत लाने की मांग उठती रही है।

जनवरी 2026 में नेताजी की 129वीं जयंती के अवसर पर भी अनिता बोस फाफ ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर अवशेषों को भारत लाने की मांग दोहराई थी।

नेताजी की मृत्यु को लेकर दशकों से रहस्य

सुभाष चंद्र बोस के 1945 में लापता होने और उनकी मृत्यु को लेकर लंबे समय से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। आधिकारिक रूप से लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में विमान दुर्घटना के बाद नेताजी की मृत्यु हुई थी।

लेकिन इस दावे को लेकर कई सवाल भी उठते रहे। नेताजी के समर्थकों और कुछ शोधकर्ताओं ने उनकी मृत्यु की परिस्थितियों तथा रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियों की पहचान पर सवाल उठाए हैं। अलग-अलग जांच आयोगों की रिपोर्टों को लेकर भी मतभेद रहे हैं।

यही वजह है कि जापान में रखे अवशेषों को भारत लाने का मामला भावनात्मक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

पहले दायर याचिका का भी रहा है जिक्र

इस मामले में इससे पहले नेताजी के एक रिश्तेदार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। बाद में अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ स्वयं इस मामले में याचिका दायर कर सकती हैं। अब उनकी ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

अब केंद्र के जवाब पर टिकी नजर

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद अब केंद्र सरकार के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि रेनकोजी मंदिर में रखे नेताजी से संबंधित अवशेषों को भारत वापस लाने के संबंध में उसकी नीति और स्थिति क्या है।

इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत सरकार के जवाब और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी। इससे नेताजी की अस्थियों की भारत वापसी को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस देश के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं। ऐसे में उनके कथित अवशेषों को भारत लाने का मुद्दा एक बार फिर देश के सामने चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं।

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