वेश्यावृत्ति को पेशा माना, लेकिन वेश्यालयों को गैरकानूनी क्यों? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे की वजह समझिए

वेश्यावृत्ति को पेशा माना, लेकिन वेश्यालयों को गैरकानूनी क्यों? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे की वजह समझिए

भारत में वेश्यावृत्ति (Sex Work) को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है। बहुत से लोग मानते हैं कि यह पूरी तरह गैरकानूनी है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। भारतीय कानून के तहत किसी वयस्क व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा से यौन सेवाएं प्रदान करना अपने आप में अपराध नहीं है। इसी आधार पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि सेक्स वर्क करने वाले लोगों को संविधान के तहत सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है और उन्हें अन्य नागरिकों की तरह कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।

हालांकि, वेश्यावृत्ति और वेश्यालय (Brothel) चलाने के बीच कानून स्पष्ट अंतर करता है। भारत में लागू Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 का उद्देश्य मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार और यौन शोषण को रोकना है। इस कानून के तहत वेश्यालय चलाना, किसी व्यक्ति की कमाई पर निर्भर रहना, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सार्वजनिक रूप से दलाली करना या किसी को देह व्यापार के लिए मजबूर करना अपराध माना गया है। कानून निर्माताओं का मानना रहा कि वेश्यालयों के जरिए मानव तस्करी और संगठित शोषण को बढ़ावा मिल सकता है।

साल 2022 में Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि स्वेच्छा से सेक्स वर्क करने वाले वयस्कों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेक्स वर्क भी एक पेशा है और इसमें लगे लोगों को सम्मान, सुरक्षा और मौलिक अधिकार मिलने चाहिए। लेकिन अदालत ने यह नहीं कहा कि वेश्यालय चलाना या मानव तस्करी से जुड़े कार्य वैध हो गए हैं। ये गतिविधियां अब भी कानून के तहत प्रतिबंधित हैं।

सरल शब्दों में कहें तो भारतीय कानून व्यक्ति की स्वेच्छा और उसके अधिकारों को मान्यता देता है, लेकिन दलाली, शोषण, तस्करी और संगठित देह व्यापार के नेटवर्क पर रोक लगाना चाहता है। यही कारण है कि वयस्कों द्वारा स्वेच्छा से किया गया सेक्स वर्क अपराध नहीं माना जाता, जबकि वेश्यालयों का संचालन और उससे जुड़ी कई गतिविधियां आज भी गैरकानूनी हैं।

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