
क्या आपकी क्रीम में भी मौजूद है कॉकरोच? मॉइस्चराइजर से लेकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स तक में होता है इस्तेमाल!
सुनने में भले ही यह अजीब लगे, लेकिन कॉकरोच और अन्य कीड़ों से प्राप्त कुछ तत्वों का इस्तेमाल दुनिया भर में कई कॉस्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में किया जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि क्रीम या मॉइस्चराइजर में सीधे कॉकरोच मिलाए जाते हैं। दरअसल, वैज्ञानिक कीड़ों से प्राप्त कुछ प्राकृतिक यौगिकों का उपयोग त्वचा की देखभाल और सौंदर्य उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कॉकरोच के शरीर में पाया जाने वाला पदार्थ काइटिन (Chitin) और उससे बनने वाला काइटोसान (Chitosan) कॉस्मेटिक उद्योग में उपयोगी माना जाता है। काइटोसान में नमी बनाए रखने, त्वचा की सुरक्षा करने और कुछ उत्पादों की बनावट सुधारने के गुण पाए जाते हैं। यही कारण है कि कुछ स्किनकेयर और कॉस्मेटिक उत्पादों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि यह केवल कॉकरोच से ही नहीं, बल्कि झींगा, केकड़े और अन्य जीवों से भी प्राप्त किया जा सकता है।
ब्यूटी इंडस्ट्री में कीड़ों से प्राप्त अन्य तत्वों का भी उपयोग होता है। उदाहरण के लिए, कुछ लिपस्टिक, ब्लश और रंगीन कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होने वाला लाल रंग कार्माइन (Carmine) नामक पदार्थ से बनाया जाता है, जो एक विशेष कीट से प्राप्त होता है। इसलिए किसी उत्पाद में कीट-आधारित तत्व होने का अर्थ यह नहीं है कि उसमें पूरा कीड़ा मौजूद है, बल्कि उससे प्राप्त वैज्ञानिक रूप से संसाधित सामग्री का उपयोग किया गया है।
हालांकि आजकल कई कंपनियां शाकाहारी (Vegan) और क्रूएल्टी-फ्री उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं, जिनमें पशु या कीट-आधारित सामग्री का उपयोग नहीं किया जाता। इसलिए यदि कोई उपभोक्ता ऐसे तत्वों से बचना चाहता है, तो उसे उत्पाद के लेबल और सामग्री सूची (Ingredients List) को ध्यान से पढ़ना चाहिए। आधुनिक कॉस्मेटिक उद्योग में पारदर्शिता बढ़ने के साथ कंपनियां अपने उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले घटकों की जानकारी भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध करा रही हैं।

