
‘राहुल गांधी भी हमको जेल से छुड़वाए हैं’, स्वतंत्र भारद्वाज के पुराने बयान पर नया विवाद
स्वतंत्र भारद्वाज के एक कथित पुराने बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नया विवाद खड़ा हो गया है। बयान में राहुल गांधी का नाम लेते हुए जेल से छुड़वाने का दावा किए जाने की बात सामने आई है, जबकि अब इसी कथन को लेकर सवाल और प्रतिक्रियाएं तेज हैं।
अब अपने ही बयान पर सफाई देते नजर आए स्वतंत्र भारद्वाज, बोले—वह सब ‘सरकाज्म’ था
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर जारी विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज का नया बयान सामने आया है। पहले एक पॉडकास्ट में राजनीतिक नेताओं के समर्थन और जेल न जाने को लेकर बड़े दावे करने के बाद अब स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा है कि उनके बयान को गंभीरता से नहीं, बल्कि व्यंग्यात्मक अंदाज यानी “सरकाज्म” के रूप में समझा जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि अगर किसी को उनके पुराने बयान का संदर्भ समझ में नहीं आता, तो वह राहुल गांधी का नाम लेकर भी कह सकते हैं कि उन्होंने उन्हें जेल से छुड़वाया है। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद और अभिनेता शाहरुख खान जैसे नामों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के बयान व्यंग्य के तौर पर दिए जा सकते हैं।
पहले नेताओं के नाम लेकर किया था समर्थन का दावा
इससे पहले वायरल हुए पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर निशु आजाद के पिता पर हमला करने और जेल न जाने का दावा किया था। बातचीत के दौरान उन्होंने भाजपा नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा तथा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित अन्य लोगों के समर्थन का जिक्र किया था। उनके इन बयानों के वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे थे।
अब स्वतंत्र भारद्वाज का कहना है कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान का नाम लेने के पीछे उनका आशय किसी मामले में हस्तक्षेप या उन्हें जेल से छुड़वाने का दावा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका मतलब केवल इतना था कि हिंदुत्व और सनातन से जुड़े कार्यों में उन्हें समर्थन मिलता है।
बयान और सफाई के बीच बढ़े सवाल
मामले में स्वतंत्र भारद्वाज के अलग-अलग बयानों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर वायरल पॉडकास्ट में कथित तौर पर जंतर-मंतर की घटना और राजनीतिक पहुंच को लेकर दावे किए गए, वहीं बाद में उन्होंने घटना को आत्मरक्षा से जोड़ते हुए अपनी सफाई पेश की। अब राजनीतिक नेताओं के नाम लेने वाले बयान को भी “सरकाज्म” बताया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी पुलिस रिकॉर्ड और स्वतंत्र भारद्वाज के सार्वजनिक बयानों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जंतर-मंतर की घटना से शुरू हुआ था विवाद
यह विवाद 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां निशु आजाद के पिता संजय कुमार के घायल होने का मामला सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने घटना के संबंध में कहा है कि उन्हें हाथापाई के दौरान चोट लगी थी और मामले में जांच तथा कानूनी प्रक्रिया जारी है। वहीं, घटना से जुड़े अलग-अलग पक्षों के दावे सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं।
फिलहाल, स्वतंत्र भारद्वाज के पुराने बयान और अब दी जा रही सफाई के बीच विरोधाभास को लेकर बहस जारी है। मामले से जुड़े आरोपों और दावों की अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

