राहुल गांधी की PM मोदी पर टिप्पणी, चिराग पासवान ने दिया दो टूक जवाब

राहुल गांधी की PM मोदी पर टिप्पणी, चिराग पासवान ने दिया दो टूक जवाब

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी पर सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिस पर अब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

चिराग पासवान ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

राहुल गांधी ने PM मोदी पर क्या कहा?

दरअसल, राहुल गांधी विदेश नीति और केंद्र सरकार के रुख को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पीएम मोदी को लेकर कहा कि “हम पागल कर देंगे, रात में सोते नहीं हैं” जैसी टिप्पणी की।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी और एनडीए नेताओं ने कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा से जोड़ते हुए राहुल गांधी की भाषा पर सवाल उठाए।

कांग्रेस की ओर से लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। राहुल गांधी भी कई मौकों पर सरकार से चीन, अमेरिका, रूस और अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों को लेकर जवाब मांगते रहे हैं।

चिराग पासवान ने राहुल गांधी को घेरा

राहुल गांधी की टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अमर्यादित भाषा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

चिराग पासवान ने लिखा कि लोकतंत्र में हर तरह के विरोध की अनुमति है, लेकिन भाषा की मर्यादा नहीं गिरनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान तर्क और संवाद से होती है, अपशब्दों से नहीं।

चिराग ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उम्र में उनसे बड़े हैं और ऐसे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।

‘विरोध की इजाजत है, लेकिन मर्यादा जरूरी’

चिराग पासवान ने अपने बयान में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि विपक्ष को सरकार और प्रधानमंत्री की नीतियों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना जरूरी है और विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत टिप्पणियों और अमर्यादित भाषा में बदलना उचित नहीं है।

उनका कहना है कि नेताओं को अपने बयानों में संयम रखना चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का असर आम लोगों और राजनीतिक माहौल दोनों पर पड़ता है।

विदेश नीति को लेकर आमने-सामने सत्ता और विपक्ष

राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को विदेश नीति के मुद्दे पर विपक्ष और देश को ज्यादा स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

दूसरी ओर, बीजेपी और एनडीए का कहना है कि मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है और देश के हितों को प्राथमिकता देते हुए विदेश नीति को आगे बढ़ाया है।

इसी राजनीतिक टकराव के बीच राहुल गांधी की ताजा टिप्पणी ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है।

2026 में भी जारी है सियासी बयानबाजी

देश की राजनीति में इस समय कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। संसद से लेकर सड़क तक दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं। ऐसे में नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रहे हैं।

चिराग पासवान की प्रतिक्रिया को एनडीए की ओर से राहुल गांधी के बयान के खिलाफ एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री की आलोचना पर रोक लगाने की बात नहीं कही, बल्कि विरोध के तरीके और भाषा को लेकर सवाल उठाया।

अब देखना होगा कि राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से चिराग पासवान के इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं। फिलहाल, राहुल गांधी की टिप्पणी और चिराग पासवान के जवाब ने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

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