
राम रहीम की 17वीं बार रिहाई पर कांग्रेस का बीजेपी पर हमला, पवन खेड़ा बोले- ‘मगरमच्छ के आंसू बहा रही पार्टी’
नई दिल्ली। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के एक बार फिर जेल से बाहर आने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए राम रहीम को इस बार 21 दिन की फरलो मिली है। इसके बाद कांग्रेस ने केंद्र और हरियाणा की बीजेपी सरकार पर सवाल उठाते हुए महिलाओं की सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर जमकर निशाना साधा है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलने को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी महिलाओं के आरक्षण और महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन दूसरी तरफ दुष्कर्म के मामले में दोषी व्यक्ति को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति दी जा रही है।
पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी महिलाओं के आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को लेकर चाहे जितने भी “मगरमच्छ के आंसू” बहा ले, यह सब महज टीवी सीरियल जैसा ड्रामा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी महिलाओं के खिलाफ है और ऐसे मामलों में दोषियों के प्रति नरम रवैया अपनाया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राम रहीम को 2017 में गिरफ्तार किए जाने के बाद से अब तक कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। उनके मुताबिक, वह 450 से ज्यादा दिन जेल से बाहर बिता चुका है। कांग्रेस ने इसी आधार पर सरकार की नीति और जेल से बाहर आने की अनुमति देने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
17वीं बार जेल से बाहर आया राम रहीम
गुरमीत राम रहीम सिंह को अगस्त 2017 में दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उसे 20 साल की सजा सुनाई गई। जेल जाने के बाद से ही राम रहीम को कई बार पैरोल और फरलो मिलती रही है।
इस बार उसे 21 दिन की फरलो दी गई है। यह 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद उसके जेल से बाहर आने का 17वां मौका बताया जा रहा है। साल 2026 में भी यह तीसरी बार है जब उसे जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है।
फरलो के दौरान राम रहीम के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहने की बात सामने आई है। बार-बार मिल रही अस्थायी रिहाई को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।
कांग्रेस ने महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया
कांग्रेस ने राम रहीम की फरलो को महिला सुरक्षा के बड़े मुद्दे से जोड़ते हुए बीजेपी पर राजनीतिक हमला बोला है। पवन खेड़ा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर है तो उसे ऐसे मामलों में स्पष्ट और सख्त नीति अपनानी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि महिलाओं के आरक्षण और सशक्तिकरण की बात करने के साथ-साथ सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को बार-बार राहत मिलने से जनता के बीच गलत संदेश न जाए।
राम रहीम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी चर्चा में
राम रहीम से जुड़े एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भी राजनीतिक बहस तेज हुई है। मार्च में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने पत्रकार की हत्या के मामले में राम रहीम को बरी कर दिया था। इस मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने पहले उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद मृतक के परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। 10 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान राम रहीम के वकील ने अदालत को बताया कि हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब तक कोई अपील दाखिल नहीं की है।
इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हरियाणा सरकार के रुख को लेकर टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि अदालत को पता है कि शायद राज्य सरकार इस मामले में अपील के लिए नहीं आएगी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद भी हरियाणा सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठे।
पैरोल और फरलो को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलने का मुद्दा नया नहीं है। हर बार उसकी अस्थायी रिहाई के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी समय के आसपास राम रहीम की रिहाई को लेकर राजनीतिक लाभ की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े होते हैं।
वहीं, सरकार और प्रशासन की ओर से पैरोल या फरलो को नियमों के तहत दी जाने वाली राहत बताया जाता रहा है। इस प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग मौकों पर राजनीतिक विवाद जरूर सामने आता रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
राम रहीम की 17वीं बार जेल से बाहर आने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर सीधा हमला किया है। पवन खेड़ा के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सरकार की नीतियों से जोड़कर जनता के सामने उठाना चाहती है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक तरफ कांग्रेस राम रहीम की बार-बार अस्थायी रिहाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी चर्चा में है कि गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति को बार-बार पैरोल और फरलो देने की प्रक्रिया में किन नियमों और परिस्थितियों को आधार बनाया जाता है।
फिलहाल राम रहीम 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर है और उसके बाहर आने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर पैरोल, फरलो और महिला सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है।

