
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग पर जंतर-मंतर में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन, क्यों अकेले पड़ते दिखे उमर अब्दुल्ला?
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने और लोकतांत्रिक अधिकारों को पूरी तरह बहाल करने की मांग की। इस प्रदर्शन में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इसे जम्मू-कश्मीर की जनता की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए केंद्र पर अपने वादे को जल्द पूरा करने का दबाव बनाने की कोशिश की।
हालांकि, इस प्रदर्शन में विपक्षी दलों की सीमित मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया। कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रहे, जिससे राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि इस मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला को व्यापक विपक्षी समर्थन क्यों नहीं मिल सका। विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों की अपनी-अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं और रणनीतियां होने के कारण राज्य का दर्जा बहाली के मुद्दे पर साझा मंच नहीं बन पाया।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में विभाजित कर दिया था। इसके बाद से नेशनल कॉन्फ्रेंस लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाती रही है। केंद्र सरकार पहले भी संसद और सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन इसकी समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।

