पंजाब में चन्नी का ‘सिद्धू अवतार’, कांग्रेस फिर 5 साल पुराने मुकाम पर खड़ी है

पंजाब में चन्नी का ‘सिद्धू अवतार’, कांग्रेस फिर 5 साल पुराने मुकाम पर खड़ी है

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Charanjit Singh Channi के हालिया तेवरों और बयानों को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। कई राजनीतिक विश्लेषक उनके रुख की तुलना कांग्रेस नेता Navjot Singh Sidhu की उस आक्रामक शैली से कर रहे हैं, जिसने करीब पांच साल पहले पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस एक बार फिर ऐसे दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां संगठन के भीतर नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर अलग-अलग आवाजें सुनाई दे रही हैं। यही वजह है कि “चन्नी का सिद्धू अवतार” जैसी राजनीतिक टिप्पणियां भी सामने आ रही हैं।

साल 2021 में पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और आपसी मतभेदों ने पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान पहुंचाया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री, प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

अब एक बार फिर चन्नी के मुखर रुख और संगठन से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनावों की तैयारी मजबूती से की जा रही है।

विपक्षी दल इस घटनाक्रम को कांग्रेस की अंदरूनी कलह का संकेत बताते हुए निशाना साध रहे हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक दलों में विचार-विमर्श और अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है। पार्टी का दावा है कि सभी नेता संगठन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। यदि पार्टी आंतरिक मतभेदों को नियंत्रित कर एकजुटता बनाए रखती है, तो वह राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है। वहीं, यदि मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे, तो विपक्ष को कांग्रेस पर हमला करने का एक और बड़ा मुद्दा मिल सकता है।

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