
*डाबला सरकारी स्कूल में गुरु शिष्यों ने मिलकर किया सहयोग*
राजकीय उच्च माध्यमिक डाबला आज़ादी के समय का विद्यालय है जिसका भवन,छत आदि बहुत पुराने हो गये है। विद्यालय के भवन को मरम्मत करने के लिए विद्यालय के पूर्व छात्रों, भामाशाहों, ग्रामवासियों ने बीड़ा उठाया और लगभग दस लाख रूपये जोड़कर छत मरम्मत और आँगन डलवाने का कार्य चल रहा है सभी ग्रामवासियों का मानना है कि डाबला का सरकारी विद्यालय हमारे लिए विद्यापीठ की तरह है। हमारे क्षेत्र में जितनी भी समृद्धता दिखाई दे रही है उसमे डाबला के सरकारी विद्यालय का बड़ा योगदान है जब दूर दूर तक पढ़ने के लिए विद्यालय नही थे तो डाबला और आसपास के गाँवों के लोगो को डाबला के सरकारी विद्यालय ने शिक्षा और संस्कार दिए है। इसी सहयोग के क्रम में एक आदर्श उदाहरण गुरु शिष्यों का देखने को मिला है डाबला स्कूल से पढ़कर गये प्राचार्य नवीन टाँक के दो शिष्य ,ऋषि कुमार,राजू ठेकादार ने मिलकर विद्यालय के छत कर जाने के लिए सीढ़ी निर्माण हेतु स्वीकृति दी है। ऋषि कुमार ने सन दो हज़ार नौ में सरकारी विद्यालय से कक्षा बारह उत्तीर्ण की और राजू ठेकादार ने कक्षा दस तक डाबला सरकारी विद्यालय में अध्ययन किया। विद्यालय विकास के कार्यो के नेतृत्व और कार्य संभाल रहें सत्यप्रकाश स्वामी और व्याख्याता नरेश कुमार ने बताया कि सीढ़ी बनने के बाद छत पर जाना आसान होगा और वर्षा ऋतु में छत की देखभाल आसानी से हो सकेगा। नवीन टाँक ने सन दो हज़ार में कक्षा बारह के सरकारी विद्यालय से उत्तीर्ण कर दो हज़ार ग्यारह में व्याख्याता पद पर चयनित होकर डाबला सरकारी स्कूल आये और दो हज़ार उन्नीस तक प्राचार्य पद पर पदोन्नति तक डाबला स्कूल में सेवाएं दी ऋषि कुमार वर्तमान में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड में व्याख्याता के पद पर कार्यरत है और राजू भवन निर्माण के ठेकेदार है। राजू और ऋषि दोनों नवीन जी के प्रिय स्टूडेंट रहे है।

