
UP में 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव, बीजेपी के 8वीं सीट के लिए 1 वोट कम; सपा के सामने भी चुनौती
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव का ऐलान होने के साथ ही सियासी गणित तेज हो गया है। विधानसभा में मौजूदा प्रभावी संख्याबल के आधार पर बीजेपी खेमे के सामने 7 सीटें सुरक्षित करने के बाद आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती दिखाई दे रही है। वहीं सपा और उसके सहयोगियों के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है।
राज्यसभा सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है।
10 सीटें खाली, बीजेपी की 8 और सपा की 1 सीट
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें वर्तमान में 8 सीटें बीजेपी, एक सपा और एक बसपा के पास बताई जा रही हैं।
हालांकि चुनाव के बाद सीटों का बंटवारा मौजूदा सदस्यों की स्थिति के आधार पर अपने-आप तय नहीं होगा। असली तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि राजनीतिक दल कितने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं और चुनाव के समय विधायकों का वास्तविक संख्याबल क्या रहता है।
विधानसभा में किसके पास कितने विधायक?
दिए गए मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रभावी तौर पर 398 विधायक हैं। पार्टीवार स्थिति इस प्रकार बताई गई है—
- बीजेपी — 257
- समाजवादी पार्टी — 101
- अपना दल (सोनेलाल) — 13
- राष्ट्रीय लोकदल — 9
- सुभासपा — 6
- निषाद पार्टी — 5
- कांग्रेस — 2
- जनसत्ता दल लोकतांत्रिक — 2
- असंबद्ध विधायक — 3
बीजेपी के सहयोगी दलों को जोड़ने पर NDA खेमे का आंकड़ा करीब 295 तक पहुंचता है, जबकि सपा के साथ कांग्रेस के दो विधायकों को जोड़ने पर विपक्षी खेमे के पास 103 विधायक बताए जा रहे हैं।
37 वोट का कोटा, बीजेपी के सामने 8वीं सीट का गणित
अगर 398 प्रभावी वोट माने जाएं और 10 सीटों के लिए चुनाव हो, तो कोटा करीब 37 वोट बनता है। चुनाव आयोग के अनुसार राज्यसभा चुनाव में आवश्यक कोटा हासिल करने के बाद उम्मीदवार निर्वाचित होता है और जरूरत पड़ने पर दूसरी पसंद के मतों के आधार पर मतों का हस्तांतरण किया जाता है।
बीजेपी खेमे के पास 295 विधायक माने जाएं तो 7 उम्मीदवारों को 37-37 वोट दिलाने के लिए 259 वोट चाहिए होंगे।
295 – 259 = 36 वोट
यानी सात सीटें निकालने के बाद बीजेपी खेमे के पास 36 वोट बचेंगे, जबकि आठवीं सीट के लिए 37 वोट की जरूरत होगी। इस गणित में आठवीं सीट के लिए कम से कम एक अतिरिक्त वोट जुटाना पड़ेगा।
यही वजह है कि यदि मुकाबला 10 उम्मीदवारों तक सीमित रहता है तो अतिरिक्त समर्थन या क्रॉस-वोटिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
सपा के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या
सपा के 101 और कांग्रेस के 2 विधायकों को जोड़कर आंकड़ा 103 होता है। दो सीटों के लिए 37-37 यानी कुल 74 वोट की जरूरत होगी।
103 – 74 = 29 वोट
यानी इस गणित के आधार पर दो सीटें हासिल करने के बाद सपा-कांग्रेस खेमे के पास 29 वोट बच सकते हैं।
हालांकि, पिछले राज्यसभा चुनावों में सपा के भीतर हुई क्रॉस-वोटिंग और मौजूदा विधायकों की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अंतिम गणित उम्मीदवारों के नामांकन और मतदान के समय ही स्पष्ट होगा।
असली खेल 11वां उम्मीदवार आने पर बदलेगा
राज्यसभा चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 10 सीटों के लिए कितने उम्मीदवार मैदान में रहते हैं।
अगर 10 सीटों के लिए 10 उम्मीदवार ही रह जाते हैं और संबंधित खेमे अपने-अपने संख्याबल के मुताबिक उम्मीदवार उतारते हैं, तो मुकाबला अपेक्षाकृत सीधा हो सकता है।
लेकिन यदि किसी दल या गठबंधन की ओर से अतिरिक्त उम्मीदवार उतारा जाता है और कुल उम्मीदवारों की संख्या बढ़ती है, तो प्राथमिकता वाले मतों और उपलब्ध वोटों का गणित बदल जाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरी पसंद के मत और संभावित क्रॉस-वोटिंग महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
क्या बसपा राज्यसभा में हो जाएगी शून्य?
मौजूदा समीकरण के मुताबिक बसपा की एक सीट भी इस चुनाव में खाली हो रही है। यदि बसपा अपना उम्मीदवार जीताने के लिए आवश्यक संख्या नहीं जुटा पाती है और कोई अन्य उम्मीदवार उसकी जगह जीतता है, तो राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है।
हालांकि, अंतिम स्थिति उम्मीदवारों के नामांकन, समर्थन और मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।
2027 से पहले राज्यसभा चुनाव क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह राज्यसभा चुनाव दलों के लिए संख्या और संगठनात्मक ताकत का महत्वपूर्ण परीक्षण होगा। खासकर तब, जब किसी खेमे के पास अपनी उपलब्ध सीटों से ज्यादा उम्मीदवार उतारने की रणनीति होती है।
ऐसी स्थिति में हर विधायक का वोट महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, राज्यसभा चुनाव में मतदान की STV व्यवस्था के कारण केवल पहली पसंद ही नहीं, बल्कि दूसरी पसंद के मत भी कुछ परिस्थितियों में परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध संख्याबल के आधार पर 7 सीटों का बीजेपी खेमे की ओर और 2 सीटों का सपा खेमे की ओर जाना गणितीय रूप से संभव दिखता है, जबकि 10वीं सीट के लिए मुकाबले की स्थिति उम्मीदवारों और गठबंधनों पर निर्भर करेगी। अंतिम तस्वीर नामांकन और मतदान के समय सामने आएगी।

