
UCC बिहार में लागू होगा या नहीं? JDU के विरोध पर BJP का जवाब, जानें पूरा मामला
पटना। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बाद बिहार में NDA के भीतर ही मतभेद सामने आ गए हैं। जहां BJP UCC को लेकर आगे बढ़ने के पक्ष में है, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने बिहार में इसे लागू करने पर विरोध जताया है।
JDU ने क्या कहा?
JDU नेता श्याम रजक ने साफ कहा है कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर UCC के विचार का समर्थन कर सकती है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने का विरोध करेगी। पार्टी का कहना है कि बिहार की सामाजिक संरचना और अलग-अलग समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर ही इस तरह के कानून पर फैसला होना चाहिए।
हालांकि, JDU की तरफ से यह भी कहा गया है कि अंतिम रुख कानून के ड्राफ्ट को देखने और केंद्र सरकार से बातचीत के बाद स्पष्ट किया जाएगा। JDU नेताओं की बैठक भी इस मुद्दे पर हुई है और पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा जारी है।
BJP ने JDU के विरोध पर क्या कहा?
JDU के विरोध के बाद बिहार BJP ने UCC के समर्थन में अपनी स्थिति दोहराई है। BJP और उसके सहयोगी LJP (रामविलास) की ओर से इसे समानता और समान कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। BJP समर्थक नेताओं का तर्क है कि देश में नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए और इसे केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि अगर केंद्र सरकार 2029 से पहले सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य रखती है, तो बिहार में JDU के विरोध के बीच इसे कैसे लागू किया जाएगा?
क्या बिहार में UCC अभी लागू हो सकता है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि बिहार में UCC लागू होगा या नहीं। अभी बिहार में UCC लागू नहीं हुआ है और NDA के भीतर इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी है। अमित शाह का लक्ष्य राजनीतिक रूप से स्पष्ट है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार और NDA के घटक दलों के बीच सहमति महत्वपूर्ण होगी।
बिहार में JDU एक प्रमुख सहयोगी दल है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी का विरोध इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना देता है। इसलिए आने वाले दिनों में BJP और JDU के बीच बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।
NDA में भी अलग-अलग सुर
UCC को लेकर NDA के सभी दलों की राय एक जैसी नहीं है। TDP और शिवसेना ने अमित शाह के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जबकि JDU ने बिहार में इसके खिलाफ रुख अपनाया है। LJP (रामविलास) ने भी UCC के समर्थन का संकेत दिया है। इससे साफ है कि UCC को लेकर NDA के अंदर व्यापक सहमति बनाने की चुनौती BJP के सामने है।
अब आगे क्या होगा?
बिहार में UCC को लेकर फिलहाल गेंद BJP और JDU के बीच होने वाली बातचीत के पाले में है। JDU ड्राफ्ट और उसके प्रावधानों को देखने के बाद अपना अंतिम रुख तय करने की बात कह रही है। वहीं BJP UCC को समानता और समान नागरिक कानून के अपने लंबे समय से चले आ रहे एजेंडे के तौर पर आगे बढ़ा रही है।
ऐसे में बिहार UCC की अगली बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला बन सकता है। अगर BJP और JDU के बीच सहमति बनती है तो बिहार में UCC लागू करने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन मौजूदा विरोध कायम रहता है तो NDA के भीतर यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक टकराव पैदा कर सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बिहार में UCC को लेकर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

