
‘ODI क्रिकेट मर गया है…’, हरभजन सिंह के बयान पर बवाल
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह का वनडे क्रिकेट को लेकर दिया गया बयान इस समय चर्चा में है। हरभजन ने कहा है कि उन्हें अब ODI क्रिकेट में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है और उनके मुताबिक यह फॉर्मेट अपनी चमक खो चुका है। उनके इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई है।
हरभजन का मानना है कि मौजूदा दौर में टेस्ट क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की लोकप्रियता अलग-अलग वजहों से बनी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है।
‘मुझे ODI क्रिकेट में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं’
हरभजन सिंह ने PTI से बातचीत में वनडे क्रिकेट को लेकर बेहद स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि वह ODI क्रिकेट देखना पसंद नहीं करते और उनके मुताबिक वह इसे पहले ही देख चुके हैं।
इसके विपरीत टेस्ट क्रिकेट को लेकर उनका नजरिया बिल्कुल अलग है। हरभजन ने कहा कि अगर भारत ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ टेस्ट खेलता है तो वह उसे देखना पसंद करेंगे और टेस्ट क्रिकेट देखने के लिए पैसे भी खर्च करने को तैयार हैं।
टेस्ट क्रिकेट को बचाने की जरूरत
हरभजन सिंह ने टेस्ट क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे महत्वपूर्ण फॉर्मेट बताया। उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट को जीवित और लोकप्रिय बनाए रखने के लिए ICC समेत क्रिकेट से जुड़े सभी पक्षों को गंभीरता से काम करना होगा।
उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी जगह बनाए रखने के लिए नए तरीके खोजने होंगे।
फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने बदल दी दर्शकों की पसंद
हरभजन ने क्रिकेट में आए बदलाव के लिए फ्रेंचाइजी लीग के बढ़ते प्रभाव को भी जिम्मेदार माना। उन्होंने कहा कि क्रिकेट की संस्कृति में बड़ा बदलाव पहले ही आ चुका है।
उनके मुताबिक IPL, The Hundred और BBL जैसी लीग में दर्शकों की भारी दिलचस्पी दिखाई देती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में टीमों की लोकप्रियता के हिसाब से दर्शकों की संख्या में बड़ा अंतर नजर आता है।
हरभजन ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े मुकाबले अभी भी दर्शकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन भारत के कुछ अन्य देशों के खिलाफ मैचों में उतनी व्यूअरशिप नहीं दिखाई देती।
‘70 प्रतिशत बदलाव पहले ही हो चुका है’
पूर्व भारतीय क्रिकेटर का मानना है कि क्रिकेट की दुनिया में लगभग 70 प्रतिशत बदलाव पहले ही हो चुका है। फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने दर्शकों की आदत और प्राथमिकता को काफी हद तक बदल दिया है।
उनके अनुसार लोग अब छोटी अवधि में होने वाली तेज और रोमांचक लीग क्रिकेट की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को पुराने स्तर की लोकप्रियता वापस हासिल करना आसान नहीं होगा।
अश्विन भी उठा चुके हैं ODI के भविष्य पर सवाल
दिलचस्प बात यह है कि हरभजन सिंह से पहले पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।
अश्विन ने 2027 वनडे विश्व कप के बाद इस फॉर्मेट के भविष्य को लेकर अनिश्चितता जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह 2027 वर्ल्ड कप के बाद ODI क्रिकेट की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
हालांकि, अश्विन ने यह भी माना था कि बड़े खिलाड़ियों की मौजूदगी कई बार वनडे क्रिकेट में दर्शकों की दिलचस्पी वापस ला सकती है।
क्या सच में खत्म हो रहा है ODI क्रिकेट?
हरभजन का बयान निश्चित तौर पर बहस को जन्म देता है, लेकिन यह कहना कि ODI क्रिकेट वास्तव में खत्म हो चुका है, एक राय है, कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं।
वनडे क्रिकेट के सामने जरूर चुनौतियां हैं—टेस्ट क्रिकेट की ऐतिहासिक प्रतिष्ठा और टी20 लीग की तेज लोकप्रियता के बीच 50 ओवर के फॉर्मेट को अपनी पहचान बनाए रखनी है।
लेकिन वनडे विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट आज भी इस फॉर्मेट को वैश्विक महत्व देते हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में ICC और क्रिकेट बोर्ड इस फॉर्मेट को किस तरह आकर्षक बनाते हैं, यह काफी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल हरभजन सिंह का ‘ODI क्रिकेट खत्म हो चुका है’ वाला बयान क्रिकेट फैंस के बीच नई बहस का कारण बन गया है—कुछ लोग उनकी बात से सहमत हैं, तो कई फैंस मानते हैं कि वनडे क्रिकेट को अभी खत्म मानना जल्दबाजी होगी।

