
Mangla Gauri Vrat Katha: मंगला गौरी व्रत की पूजा में जरूर पढ़ें यह पावन कथा, माता देंगी अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
नई दिल्ली:
सावन माह में पड़ने वाला मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाओं के लिए बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा और व्रत कथा का पाठ करने से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन, संतान सुख और परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा।
मंगला गौरी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक नगर में धर्मपाल नाम का एक धनवान व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह और उसकी पत्नी हमेशा दुखी रहते थे। एक दिन एक साधु उनके घर आए। उन्होंने व्यापारी को माता मंगला गौरी की आराधना करने और व्रत रखने का उपदेश दिया।
व्यापारी और उसकी पत्नी ने पूरी श्रद्धा से माता मंगला गौरी की पूजा शुरू की। माता की कृपा से कुछ समय बाद उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। हालांकि ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि पुत्र की आयु बहुत कम है और विवाह के तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी।
समय बीतने पर पुत्र का विवाह एक धार्मिक और पतिव्रता कन्या से हुआ। विवाह के बाद सावन के मंगलवार को नवविवाहिता ने पूरे विधि-विधान से मंगला गौरी का व्रत रखा और रातभर माता का जागरण कर उनकी आराधना की।
उसी रात माता मंगला गौरी ने स्वप्न में उसे दर्शन देकर बताया कि उसके पति पर मृत्यु का संकट आने वाला है। माता ने उसे एक विशेष उपाय बताया। देवी के बताए अनुसार उसने पूरी श्रद्धा से पूजा की और संकट को टाल दिया।
कथा के अनुसार, जब यमदूत उसके पति के प्राण लेने पहुंचे, तो माता मंगला गौरी की कृपा और पतिव्रता पत्नी के व्रत के प्रभाव से वे सफल नहीं हो सके। इस प्रकार युवक की आयु बढ़ गई और वह दीर्घायु हुआ। इसके बाद दोनों ने सुखपूर्वक जीवन बिताया।
व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिलाएं श्रद्धा और नियमपूर्वक मंगला गौरी का व्रत रखती हैं और इस कथा का पाठ करती हैं, उन्हें माता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है, पति की दीर्घायु होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
धार्मिक सूचना:
यह कथा और इससे जुड़ी मान्यताएं हिंदू धर्मग्रंथों एवं लोक-परंपराओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य धार्मिक जानकारी प्रदान करना है। अलग-अलग क्षेत्रों में कथा और पूजा-विधि में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं।

