
मध्य प्रदेश में सरकारी EV प्रोजेक्ट फेल! 77 लाख की 7 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनीं कबाड़
मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया सरकारी EV प्रोजेक्ट अब सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 8 साल पहले खरीदी गईं 7 इलेक्ट्रिक कारें, जिन पर लगभग 77 लाख रुपये खर्च किए गए थे, अब उपयोग के बजाय कबाड़ बनकर खड़ी हैं। बताया जा रहा है कि इन वाहनों को पर्यावरण संरक्षण और सरकारी कामकाज में ईंधन खर्च कम करने के मकसद से खरीदा गया था, लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण ये गाड़ियां पूरी तरह बेकार हो गईं।
सूत्रों के अनुसार, इन इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल शुरुआती दौर में कुछ विभागों में किया गया, लेकिन बाद में बैटरी खराब होने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और मरम्मत में आने वाले भारी खर्च के कारण इन्हें खड़ा कर दिया गया। कई गाड़ियों की बैटरियां पूरी तरह जवाब दे चुकी हैं, जबकि कुछ वाहनों के पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। सरकारी परिसर में खड़ी ये EV कारें अब धूल फांक रही हैं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस मामले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और संसाधनों के सही उपयोग पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को सफल बनाने के लिए केवल गाड़ियां खरीदना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मजबूत चार्जिंग नेटवर्क, समय पर मेंटेनेंस और तकनीकी सपोर्ट भी बेहद जरूरी होता है। विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाया है, जबकि संबंधित विभाग का कहना है कि पुराने मॉडल की तकनीकी सीमाओं के कारण यह स्थिति बनी। अब सरकार इन वाहनों को नीलाम करने या नए मॉडल से बदलने पर विचार कर रही है। यह मामला राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजनाओं के भविष्य पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

