
विनोद साहनी मामले में अखिलेश ने संजय निषाद तक पहुंचाया संदेशा! इस बयान के क्या हैं मायने?
उत्तर प्रदेश के गोंडा में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता विनोद साहनी की मौत के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। मामले को लेकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने लखनऊ के केजीएमयू में धरना देकर कार्रवाई की मांग की। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।
विनोद साहनी की मौत के मामले में पुलिस के मुताबिक उन्हें लाठियों से पीटा गया था, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन की जानकारी दी है। शुरुआती तौर पर घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे, लेकिन पोस्टमार्टम में गोली या चाकू से चोट के निशान नहीं मिलने की बात पुलिस ने कही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अखिलेश यादव की ओर से आया बयान राजनीतिक तौर पर इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि संजय निषाद बीजेपी सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनकी पार्टी निषाद समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती रही है। ऐसे में सपा की ओर से इस मुद्दे को उठाना सीधे तौर पर बीजेपी सरकार की कानून-व्यवस्था और सहयोगी दलों के साथ उसके रिश्तों पर सवाल खड़ा करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
संजय निषाद ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद समाज के लोगों को बार-बार निशाना बनाया जाता है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने आंदोलन तेज करने की बात भी कही है।
अखिलेश यादव के रुख का दूसरा बड़ा राजनीतिक मायना यह है कि समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को लेकर लगातार सक्रिय है। निषाद समाज पूर्वांचल और प्रदेश के कई हिस्सों में चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में किसी निषाद परिवार से जुड़े मामले पर सरकार को घेरना सपा की व्यापक सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
वहीं, संजय निषाद के लिए भी यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं बल्कि उनके राजनीतिक आधार से जुड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ वह सरकार के मंत्री हैं और दूसरी तरफ अपनी पार्टी और समुदाय के लोगों के बीच जवाबदेही का दबाव भी है। यही वजह है कि उनका धरना और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच आगे किस दिशा में जाती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को आने वाले दिनों में कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हैं। विनोद साहनी प्रकरण अब कानून-व्यवस्था के सवाल के साथ-साथ यूपी की राजनीति में सामाजिक समीकरणों और सत्तारूढ़ गठबंधन की परीक्षा का मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।

