रानी मुखर्जी ने पूरे किए सिनेमा में 30 साल, मिला डॉक्टरेट सम्मान

रानी मुखर्जी ने पूरे किए सिनेमा में 30 साल, मिला डॉक्टरेट सम्मान

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने भारतीय सिनेमा में अपने 30 साल पूरे कर लिए हैं और इस खास मौके पर उन्हें एक बेहद प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। ऑस्ट्रेलिया की La Trobe University ने उन्हें Honorary Doctor of Letters की मानद उपाधि प्रदान की है। यह सम्मान उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान के साथ-साथ मानवीय और सामाजिक मुद्दों के प्रति उनके काम के लिए दिया गया है।

रानी मुखर्जी को यह सम्मान Indian Film Festival of Melbourne (IFFM) 2026 के दौरान 14 अगस्त को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। सम्मान मिलने के दौरान रानी भावुक नजर आईं और उनकी आंखों में खुशी के आंसू भी दिखाई दिए।

30 साल के सफर पर मिला बड़ा सम्मान

रानी मुखर्जी ने साल 1996 में फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने तीन दशकों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई।

रानी ने सिर्फ ग्लैमरस भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने ऐसी फिल्मों में भी काम किया जिनमें सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता दी गई। ‘ब्लैक’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘हिचकी’, ‘मर्दानी’ सीरीज और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।

डॉक्टरेट मिलने पर भावुक हुईं रानी

मानद डॉक्टरेट मिलने के बाद रानी मुखर्जी ने इसे अपनी जिंदगी के सबसे विनम्र और यादगार पलों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सिनेमा उनके जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है और वह हमेशा मानती रही हैं कि कहानियां लोगों के दिलों को बदलने की ताकत रखती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कहानी कहने की ताकत लोगों में संवेदनशीलता पैदा कर सकती है, जरूरी मुद्दों पर बातचीत शुरू कर सकती है और सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

महिलाओं और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत किरदार

रानी मुखर्जी के करियर की एक खास बात यह रही है कि उन्होंने पर्दे पर मजबूत और संघर्षशील महिलाओं के किरदारों को बार-बार निभाया।

‘मर्दानी’ में उन्होंने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाकर महिला सुरक्षा और अपराध जैसे मुद्दों को सामने रखा। वहीं ‘हिचकी’ में शिक्षा और सामाजिक पूर्वाग्रह से जुड़े विषय को उठाया गया। ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ में उन्होंने एक मां के संघर्ष को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर पेश किया।

La Trobe University ने भी उनके काम को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं माना। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि रानी का काम सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने में योगदान देता है।

2025 में मिला था पहला नेशनल अवॉर्ड

रानी मुखर्जी के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले 2025 में उन्हें उनके करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। उन्हें फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ में शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था।

इस तरह पिछले कुछ वर्षों में रानी के अभिनय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पहचान मिल रही है।

‘मर्दानी 3’ से भी चर्चा में रहीं

साल 2026 में रानी मुखर्जी अपने करियर के 30 साल पूरे करने के साथ-साथ ‘मर्दानी 3’ को लेकर भी चर्चा में रही हैं। इस फिल्म में वह एक बार फिर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आईं।

अपने 30 साल के सफर पर रानी ने पहले भी कहा है कि उनका करियर किसी तय रणनीति के बजाय सहज फैसलों, कहानी के प्रति प्रेम और अपने काम के प्रति ईमानदारी से बना है।

रानी से पहले शाहरुख खान को भी मिल चुका है सम्मान

La Trobe University की ओर से इससे पहले बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान को भी मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे में रानी मुखर्जी का इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होना भारतीय सिनेमा के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।

तीन दशक और अब भी जारी है सफर

रानी मुखर्जी का 30 साल का फिल्मी सफर उतार-चढ़ाव, शानदार अभिनय और यादगार किरदारों से भरा रहा है। उन्होंने कॉमर्शियल फिल्मों के साथ-साथ गंभीर और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों में भी अपनी अभिनय क्षमता साबित की।

30 साल के फिल्मी सफर के बाद मिला मानद डॉक्टरेट सम्मान रानी मुखर्जी के करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान और सामाजिक सरोकारों से जुड़े काम को अब अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मान भी मिल गया है।

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