
शरद पवार के सांसदों की PM मोदी से मुलाकात, नवनीत राणा बोलीं- ‘ये कोई बुरी बात नहीं’
नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। इस मुलाकात को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच बीजेपी नेता नवनीत राणा ने कहा है कि अगर शरद पवार गुट के सांसद प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है।
नवनीत राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और किसी भी सांसद का उनसे मिलना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने इस मुलाकात को लेकर लगाई जा रही राजनीतिक अटकलों पर भी संयम बरतने की बात कही।
शरद पवार गुट के सांसदों ने PM मोदी से की मुलाकात
शरद पवार गुट के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री मोदी से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले समेत कई सांसद शामिल रहे। बैठक के दौरान महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों और संसद में उठाए जा रहे विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र की राजनीति में अलग-अलग दलों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं।
नवनीत राणा ने क्या कहा?
मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए नवनीत राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी सांसद को अपने क्षेत्र, राज्य या देश से जुड़े मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखना है तो वह उनसे मुलाकात कर सकता है।
नवनीत राणा के बयान को महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक गठजोड़ का संकेत मानने से इनकार किया और कहा कि सिर्फ मुलाकात के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
क्या बदल रहे हैं महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण?
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव हुए हैं। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद राज्य की सियासत में कई नए समीकरण बने हैं। एक ओर अजित पवार का गुट सत्ता पक्ष के साथ है, वहीं शरद पवार का गुट विपक्षी राजनीति का हिस्सा है।
ऐसे माहौल में शरद पवार गुट के सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, अभी तक इस बैठक से किसी राजनीतिक गठबंधन में बदलाव या किसी पार्टी के पाला बदलने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
सुप्रिया सुले की मुलाकात भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रिया सुले की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। प्रधानमंत्री मोदी और सुप्रिया सुले की हाल के दिनों में मुलाकातों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, सुप्रिया सुले की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात को किसी राजनीतिक बदलाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सांसदों का प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखने के लिए मिला है।
BJP की तरफ से भी आया सकारात्मक संकेत
नवनीत राणा का बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्होंने मुलाकात को लेकर कोई तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात करना किसी भी सांसद का अधिकार है और इसमें आपत्ति की कोई वजह नहीं होनी चाहिए।
इस बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में कोई नया समीकरण देखने को मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल ऐसी किसी संभावना की पुष्टि नहीं हुई है।
मुलाकात के राजनीतिक मायने क्या?
सियासी जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि बैठक के बाद शरद पवार गुट और बीजेपी की तरफ से किस तरह के बयान सामने आते हैं। अगर यह संवाद केवल संसदीय और राज्य से जुड़े मुद्दों तक सीमित रहता है, तो इसे सामान्य राजनीतिक बातचीत माना जाएगा।
लेकिन अगर आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के नेताओं के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता है या कोई बड़ा राजनीतिक बयान सामने आता है, तो महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा और तेज हो सकती है।
फिलहाल नवनीत राणा के बयान ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि शरद पवार गुट के सांसदों का PM मोदी से मिलना बीजेपी की नजर में अपने आप में कोई आपत्तिजनक बात नहीं है। अब देखना होगा कि इस मुलाकात का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर कितना पड़ता है और क्या आने वाले दिनों में कोई नया राजनीतिक मोड़ सामने आता है।

