महाराष्ट्र में क्या चल रहा? 20 दिन में दूसरी बार PM मोदी और सुप्रिया सुले की मुलाकात, सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल

महाराष्ट्र में क्या चल रहा? 20 दिन में दूसरी बार PM मोदी और सुप्रिया सुले की मुलाकात, सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। खास बात यह है कि करीब 20 दिनों के भीतर दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी मुलाकात बताई जा रही है। मुलाकात के समय और महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि, सुप्रिया सुले ने साफ किया है कि इस मुलाकात का कोई राजनीतिक मकसद नहीं है और चर्चा मुख्य रूप से महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर होगी।

8 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल PM मोदी से करेगा मुलाकात

सुप्रिया सुले अकेले प्रधानमंत्री से मिलने नहीं जा रही हैं। शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के आठ सांसदों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेगा। बैठक में महाराष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों के साथ-साथ संसद में चल रही महत्वपूर्ण बहसों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इस मुलाकात ने इसलिए भी राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि संसद का मानसून सत्र चल रहा है और परिसीमन तथा महिला आरक्षण जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं।

सुप्रिया सुले ने क्या कहा?

मुलाकात को लेकर उठ रही राजनीतिक अटकलों पर सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि इसे किसी राजनीतिक बदलाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखने के लिए मिल रहा है।

यानी फिलहाल सुप्रिया सुले की ओर से किसी गठबंधन परिवर्तन या NDA के साथ जाने का संकेत नहीं दिया गया है। इससे पहले भी वह NCP (SP) के NDA में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर चुकी हैं।

फिर क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े राजनीतिक बदलावों से गुजर चुकी है। NCP और शिवसेना में विभाजन के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के समीकरण काफी बदल चुके हैं। ऐसे में विपक्षी खेमे की एक प्रमुख नेता की प्रधानमंत्री से बार-बार मुलाकात स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन रही है।

हालांकि, केवल मुलाकात के आधार पर किसी राजनीतिक गठजोड़ या पार्टी लाइन में बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मौजूदा जानकारी में भी बैठक को महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बताया गया है।

परिसीमन और महिला आरक्षण भी अहम मुद्दा

इस मुलाकात के बीच परिसीमन का मुद्दा भी खास महत्व रखता है। संसद में परिसीमन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद रहे हैं। कांग्रेस ने NCP (SP) से अपील की है कि सुप्रिया सुले प्रधानमंत्री के साथ बैठक में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के मुद्दे पर INDIA ब्लॉक की स्थिति सामने रखें।

इससे साफ है कि बैठक सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति तक सीमित रहने वाली नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।

FCRA बिल पर भी NCP-SP का रुख

सुप्रिया सुले ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA से जुड़े प्रस्तावित विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर भी आपत्ति जताई है। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ होने वाली बैठक में पार्टी की ओर से अपनी चिंताएं रखने की संभावना है।

यानी एक तरफ महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दे हैं, तो दूसरी तरफ संसद में चल रही राष्ट्रीय बहसें भी इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बना रही हैं।

क्या महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं?

यही सबसे बड़ा सवाल है। सुप्रिया सुले और प्रधानमंत्री मोदी की लगातार मुलाकातों ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दी है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई ठोस संकेत सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि NCP (SP) अपने मौजूदा राजनीतिक गठबंधन से अलग होकर NDA के साथ जाने की तैयारी कर रही है।

सुप्रिया सुले ने खुद बैठक को महाराष्ट्र के मुद्दों से जोड़कर बताया है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक संवाद और संसदीय मुद्दों पर चर्चा के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।

महाराष्ट्र की राजनीति पर सबकी नजर

महाराष्ट्र में NCP के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक संघर्ष पहले से ही चर्चा में रहा है। ऐसे में सुप्रिया सुले का प्रधानमंत्री से संवाद निश्चित रूप से राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में अगर इस बैठक के बाद कोई बड़ा बयान या राजनीतिक कदम सामने आता है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल इतना जरूर है कि 20 दिनों के भीतर PM मोदी और सुप्रिया सुले की दूसरी मुलाकात ने महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ महाराष्ट्र के मुद्दों पर बातचीत है या भविष्य के किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की भूमिका तैयार हो रही है—इसका जवाब आने वाले समय में ही मिलेगा।

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