
Tulsidas Jayanti 2026: तुलसीदास जयंती कब है? जानें संत ने अवधी भाषा में क्यों लिखी रामचरितमानस
नई दिल्ली: भारतीय संत परंपरा के महान कवि और भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त Goswami Tulsidas की जयंती हर वर्ष श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन मनाई जाती है। वर्ष 2026 में तुलसीदास जयंती 20 अगस्त (गुरुवार) को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर में मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ, भजन-कीर्तन और विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कौन थे गोस्वामी तुलसीदास?
गोस्वामी तुलसीदास को हिंदी साहित्य के महानतम कवियों में गिना जाता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम की भक्ति और उनके आदर्शों के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना Ramcharitmanas है, जिसे करोड़ों लोग आज भी श्रद्धा और आस्था के साथ पढ़ते हैं।
अवधी भाषा में ही क्यों लिखी रामचरितमानस?
जब तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की, उस समय अधिकांश धार्मिक ग्रंथ संस्कृत में उपलब्ध थे। संस्कृत विद्वानों की भाषा मानी जाती थी और आम लोगों के लिए उसे समझना आसान नहीं था।
इसी कारण तुलसीदास ने भगवान श्रीराम की कथा को अवधी भाषा में लिखने का निर्णय लिया, ताकि सामान्य जन भी धर्म, भक्ति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को सरल भाषा में समझ सकें। उनका उद्देश्य था कि रामकथा केवल विद्वानों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे।
रामचरितमानस का महत्व
रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आदर्श जीवन का मार्गदर्शक भी माना जाता है। इसमें भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्श, माता-पिता के प्रति सम्मान, भाईचारा, त्याग, धर्म और सत्य के महत्व का सुंदर वर्णन मिलता है। यही कारण है कि आज भी देश और विदेश में करोड़ों श्रद्धालु इसका नियमित पाठ करते हैं।
तुलसीदास जयंती पर क्या करें?
तुलसीदास जयंती के अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन रामचरितमानस, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर भंडारे, सत्संग और रामकथा का आयोजन भी किया जाता है।
तुलसीदास जयंती केवल एक संत की जयंती नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भक्ति और साहित्य की उस महान विरासत को याद करने का अवसर है, जिसने सदियों से समाज को धर्म, सत्य और मानवता का मार्ग दिखाया है।

