
‘होर्मुज से टोल का ख्याल निकाल दे ईरान, बड़ा सोचे…’ दोहा वार्ता में अमेरिका ने तेहरान को दी सख्त नसीहत
दोहा: कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई ताज़ा अप्रत्यक्ष वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान को साफ संदेश दिया कि यदि वह इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या शुल्क लगाने की योजना पर आगे बढ़ता है, तो इससे किसी भी संभावित समझौते पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से कहा कि उसे अल्पकालिक आर्थिक लाभ के बजाय व्यापक और दीर्घकालिक समझौते पर ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता होता है, तो ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अन्य वित्तीय लाभ मिल सकते हैं, जो टोल वसूलने से होने वाली आय से कहीं अधिक होंगे।
होर्मुज पर क्यों बढ़ा विवाद?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हाल के महीनों में ईरान ने संकेत दिए थे कि वह इस मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर शुल्क लगाने या यातायात को नियंत्रित करने का अधिकार चाहता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
दोहा में क्या हुई बातचीत?
कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत की। चर्चा का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य, क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान की जमी हुई संपत्तियां और भविष्य के व्यापक समझौते की संभावनाएं रहीं। वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई, हालांकि किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं हुई।
तेल बाजार पर भी पड़ा असर
दोहा वार्ता से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद जगी कि यदि होर्मुज को लेकर तनाव कम होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित नहीं होगी। इसी उम्मीद के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। यदि ईरान भविष्य में टोल लगाने या जहाजों की आवाजाही पर नए नियम लागू करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसका कड़ा विरोध कर सकते हैं। फिलहाल दोनों पक्ष कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।

