
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर राहुल गांधी का पहला रिएक्शन, बोले- “कोई ताकत छात्रों की आवाज नहीं दबा सकती”
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधार की मांग उठा रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पहली बार इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया जाना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को बलपूर्वक दबाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि “कोई भी ताकत भारत के छात्रों और युवाओं को उनके भविष्य से जुड़े सवाल उठाने से नहीं रोक सकती।” उन्होंने सरकार पर “असत्य और हिंसा की राजनीति” करने का आरोप भी लगाया।
राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है और कहा है कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और डॉक्टरों की सलाह के साथ न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के अनुसार यह कदम उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, लंबे अनशन की वजह से सोनम वांगचुक कमजोर हो गए हैं। डॉक्टरों ने उन्हें लगातार निगरानी में रखा है। हालांकि उनके समर्थकों और परिवार का दावा है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रदर्शन स्थल से हटाया गया, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई स्वास्थ्य संबंधी कारणों से की गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों में नाराजगी देखी गई। कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार की कार्रवाई की आलोचना की है। दूसरी ओर, सरकार और पुलिस का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि है तथा कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की गई।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोनम वांगचुक का आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अस्पताल में इलाज के बाद आगे आंदोलन किस दिशा में बढ़ता है और सरकार तथा प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध कैसे समाप्त होता है।

