
वजन नहीं, कमर का साइज बताएगा सेहत का असली हाल! मोटापा मापने में BMI से ज्यादा असरदार हो सकता है यह तरीका
हेल्थ डेस्क। लंबे समय से मोटापे का आकलन करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (BMI) का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन अब कई विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल वजन और लंबाई के आधार पर किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हाल के शोध बताते हैं कि कमर का घेरा (Waist Circumference) और कमर-से-लंबाई अनुपात (Waist-to-Height Ratio) हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम का बेहतर संकेत दे सकते हैं।
क्यों कमर का साइज है ज्यादा अहम?
विशेषज्ञों के अनुसार पेट के आसपास जमा विसरल फैट (Visceral Fat) सबसे खतरनाक होता है। यह शरीर के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होकर हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है। वहीं BMI यह नहीं बता पाता कि शरीर में चर्बी कहां जमा है या मांसपेशियां कितनी हैं।
क्या है बेहतर फॉर्मूला?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर Waist-to-Height Ratio (WHtR) पर भी जोर देते हैं। इसका आसान नियम है:
अपनी कमर का घेरा अपनी लंबाई के आधे से कम रखें।
उदाहरण के लिए, यदि आपकी लंबाई 170 सेमी है, तो कोशिश करें कि कमर का घेरा 85 सेमी से कम रहे।
कमर कैसे नापें?
- सीधे खड़े हो जाएं।
- आखिरी पसली और कूल्हे की हड्डी के बीच वाले हिस्से पर माप लें।
- सामान्य सांस छोड़ने के बाद टेप से मापें।
- टेप बहुत कसकर या ढीला न रखें।
कमर का साइज कब बन जाता है चिंता का कारण?
- पुरुष: 90 सेमी (लगभग 35.5 इंच) या उससे अधिक होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
- महिला: 80 सेमी (लगभग 31.5 इंच) या उससे अधिक होने पर सावधानी बरतनी चाहिए।
ये सीमाएं विशेष रूप से दक्षिण एशियाई आबादी के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
सेहतमंद रहने के लिए क्या करें?
- रोज़ कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
- प्रोटीन, फल, सब्जियां और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें।
- मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखें।
- नियमित रूप से वजन के साथ-साथ कमर का माप भी जांचते रहें।
ध्यान दें: BMI आज भी एक उपयोगी स्क्रीनिंग टूल है, लेकिन इसे कमर के माप, जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य जांचों के साथ मिलाकर देखने पर स्वास्थ्य जोखिम का अधिक सटीक आकलन किया जा सकता है।

