
रायबरेली से ही क्यों चुनाव लड़ता है गांधी परिवार? कांग्रेस नेता ने बताई अंग्रेजों के जमाने की कहानी
लखनऊ। रायबरेली से गांधी परिवार के चुनाव लड़ने को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चा तेज हो गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से राहुल गांधी के रायबरेली से चुनाव लड़ने को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने रायबरेली और नेहरू-गांधी परिवार के रिश्ते को आजादी के आंदोलन और किसानों के संघर्ष से जोड़ते हुए अंग्रेजों के दौर का इतिहास सामने रखा।
पीसी शर्मा ने कहा कि बीजेपी नेताओं को आजादी के इतिहास की जानकारी नहीं है, इसलिए वे इस तरह के सवाल करते हैं। उनके मुताबिक, अंग्रेजों के शासनकाल में रायबरेली में किसानों का आंदोलन हुआ था। उस दौर में जवाहरलाल नेहरू रायबरेली पहुंचे और करीब डेढ़ महीने तक किसानों के बीच रहे। कांग्रेस नेता का दावा है कि नेहरू ने किसानों की समस्याओं को समझा और उनके आंदोलन में उनका साथ दिया।
कांग्रेस नेता ने इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को रायबरेली से गांधी परिवार के लंबे राजनीतिक रिश्ते की वजह बताया। उन्होंने कहा कि रायबरेली की जनता और नेहरू-गांधी परिवार के बीच संबंध सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें स्वतंत्रता आंदोलन के समय तक जाती हैं। उनके मुताबिक, इसी वजह से रायबरेली लगातार गांधी परिवार के लिए महत्वपूर्ण लोकसभा सीट बनी हुई है।
दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सवाल उठाया था कि नेहरू-गांधी परिवार दिल्ली से चुनाव क्यों नहीं लड़ता और चुनाव के लिए रायबरेली को ही क्यों चुनता है। इसी सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए पीसी शर्मा ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि रायबरेली के साथ गांधी परिवार का रिश्ता पुराना है और इसे केवल चुनावी गणित के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
पीसी शर्मा ने इस दौरान राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के युवाओं से जुड़ने और उनके कार्यक्रमों में युवाओं की रुचि को देखकर बीजेपी घबराई हुई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसी वजह से बीजेपी नेताओं की ओर से राहुल गांधी को लेकर बयान दिए जा रहे हैं।
रायबरेली की बात करें तो यह सीट लंबे समय से कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए महत्वपूर्ण रही है। सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। ऐसे में आने वाले चुनावों में भी रायबरेली की राजनीतिक भूमिका पर सबकी नजर बनी रहने की संभावना है।
अब कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद रायबरेली को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है। बीजेपी जहां गांधी परिवार के रायबरेली से चुनाव लड़ने को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस इसे स्वतंत्रता आंदोलन और ऐतिहासिक राजनीतिक रिश्ते से जोड़कर जवाब दे रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है।

