
बांग्लादेश में बदलता पावर बैलेंस: हसीना से यूनुस और अब रहमान तक
बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों एक दिलचस्प और तेज़ी से बदलते पावर बैलेंस के दौर से गुजर रही है। पहले जहां शेख हसीना का लंबे समय तक मजबूत राजनीतिक दबदबा देखा गया, वहीं हाल के घटनाक्रमों ने सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। सत्ता संरचना में बदलाव के साथ-साथ विभिन्न नेतृत्व चेहरों की भूमिका भी लगातार बदलती नजर आ रही है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है।
शेख हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस का नाम चर्चा में आया, जिनकी भूमिका को लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं। यूनुस के प्रभाव और उनके समर्थकों की सक्रियता ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ा। इससे यह साफ हुआ कि देश में नेतृत्व केवल औपचारिक सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि कई वैकल्पिक केंद्र भी प्रभाव डाल रहे हैं।
अब चर्चा में रहमान का नाम सामने आने के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन की भूमिका को लेकर भी नए सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि मौजूदा हालात में राष्ट्रपति एक संतुलनकारी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरण उनके लिए भी चुनौतियां बढ़ा रहे हैं। कुल मिलाकर बांग्लादेश में सत्ता का यह बदलता संतुलन आने वाले समय में और भी दिलचस्प मोड़ ले सकता है।

