
परिसीमन से ओडिशा को नुकसान होगा, राजनीतिक रूप से महत्वहीन हो जाएगा: नवीन पटनायक
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने मांग की है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी परिसीमन विधेयक में राज्य के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक प्रस्ताव पारित करने के वास्ते ‘48 घंटों के भीतर’ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं. उन्होंने आशंका जताई कि यदि परिसीमन विधेयक अपने वर्तमान स्वरूप में पारित हो जाता है तो ओडिशा के राजनीतिक हितों की घोर उपेक्षा होगी.
नई दिल्ली: बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि अगर लोकसभा की संरचना में बदलाव लाने वाला प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पारित हो जाता है, तो ओडिशा को सबसे ज्यादा नुकसान होगा और वह राजनीतिक रूप से महत्वहीन राज्य बनकर रह जाएगा.
की खबर के मुताबिक, पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके पटनायक ने प्रस्तावित संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 पर आपत्ति जताई है, जिसका उद्देश्य लोकसभा की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है.
ओडिशा में विपक्ष के नेता नवीन ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से आग्रह किया कि वे 48 घंटों के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक प्रस्ताव पारित करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि राज्य के राजनीतिक अधिकारों में अन्य राज्यों द्वारा 0.001 प्रतिशत तक की भी कमी न हो.
सीएम माझी को लिखे पत्र में नवीन पटनायक ने कहा कि ओडिशा में वर्तमान में 21 सांसद हैं, जो कुल का लगभग 3.9 प्रतिशत है. यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो प्रतिनिधित्व बढ़कर 29 हो जाएगा, लेकिन हिस्सेदारी घटकर 3.4 प्रतिशत रह जाएगी.
उन्होंने आगे कहा कि ओडिशा, जिसने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है और मानव संसाधन का पोषण किया है, राष्ट्रीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संभावित 15 प्रतिशत की हानि का सामना कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘हमारी राजनीतिक आवाज और प्रभाव अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो जाएगा. रिपोर्टों से पता चलता है कि ओडिशा नुकसान झेलने वाला चौथा सबसे बड़ा राज्य होगा, जो 4.5 करोड़ ओडिया लोगों के लिए एक बड़ा झटका और आने वाली पीढ़ियों के साथ एक घोर अन्याय होगा.’
नवीन पटनायक के अनुसार, इस विधेयक से ओडिशा के राजनीतिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए. उन्होंने इसे सहकारी संघवाद और राज्य की आकांक्षाओं के लिए खतरा बताया.
उन्होंने माझी से इस मुद्दे को मजबूती से उठाने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि आने वाली पीढ़ियां निष्क्रियता को माफ नहीं करेंगी.
उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए विधानसभाओं में महिलाओं के सशक्तिकरण और प्रतिनिधित्व के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया.

