
दिव्यांका त्रिपाठी की पोस्टपार्टम जर्नी पर विवेक दहिया का खुलासा, बोले- ‘डिप्रेशन सच में होता है…’
टीवी की चर्चित जोड़ी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया इस साल मई में जुड़वा बेटों के माता-पिता बने। बच्चों के जन्म के बाद से ही दोनों अपनी पैरेंटिंग जर्नी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में विवेक दहिया ने एक इंटरव्यू में दिव्यांका की पोस्टपार्टम जर्नी और इस दौरान आने वाले बदलावों के बारे में खुलकर बात की।
विवेक ने बताया कि बच्चों के जन्म के बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है। उन्होंने खास तौर पर पोस्टपार्टम डिप्रेशन और बच्चे को जन्म देने के बाद मां के शरीर में होने वाले शारीरिक और हार्मोनल बदलावों पर बात की।
विवेक ने पोस्टपार्टम डिप्रेशन पर की बात
हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में विवेक दहिया ने कहा कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन वास्तविक स्थिति है और बच्चे के जन्म के बाद मां को कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने समझाया कि गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसके साथ ही शरीर में आए बदलावों को स्वीकार करना भी कई महिलाओं के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विवेक ने बताया कि इस दौरान मां को यह महसूस हो सकता है कि उसका शरीर पहले जैसा नहीं रहा और अब उसे बदली हुई शारीरिक स्थिति के साथ खुद को ढालना है। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया आसान नहीं होती।
जुड़वा बच्चों के बाद बदली दिव्यांका की दिनचर्या
विवेक ने दिव्यांका के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद उनकी दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है।
दो बच्चों की देखभाल में समय और ऊर्जा दोनों अधिक लगते हैं। इसके अलावा डिलीवरी के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में भी समय लग सकता है।
विवेक ने खास तौर पर दिव्यांका की कोर स्ट्रेंथ में आए बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जुड़वा बच्चों को जन्म देने के बाद दिव्यांका की कोर स्ट्रेंथ काफी कम हो गई।
‘कोर स्ट्रेंथ अचानक बिल्कुल नहीं रही’
विवेक ने बताया कि दिव्यांका को ऐसा महसूस हुआ कि उनकी पहले वाली कोर स्ट्रेंथ अचानक काफी कम हो गई है।
उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से वर्कआउट करता है तो शरीर के कई कामों में कोर मसल्स की भूमिका होती है। ऐसे में अचानक उस ताकत में कमी महसूस होना काफी अलग अनुभव हो सकता है।
विवेक के मुताबिक, दिव्यांका के लिए भी यह बदलाव आसान नहीं रहा।
उन्होंने इस अनुभव को बेहद सरल तरीके से समझाते हुए बताया कि शरीर पहले की तरह मजबूत महसूस नहीं होता और उसे दोबारा रिकवर होने में समय लगता है।
पोस्टपार्टम रिकवरी में समय लगना सामान्य है
बच्चे को जन्म देने के बाद शरीर को रिकवर होने में समय लग सकता है। इस दौरान शारीरिक बदलावों के साथ नींद की कमी, नई जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
खासकर जुड़वा बच्चों की देखभाल में माता-पिता की जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं। ऐसे में परिवार का सहयोग और पर्याप्त आराम काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
पोस्टपार्टम मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता भी जरूरी है। लगातार उदासी, चिंता, बहुत ज्यादा तनाव या रोजमर्रा के कामों में रुचि खत्म होने जैसी परेशानियां लंबे समय तक बनी रहें तो किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है।
मां के लिए सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक बदलाव भी
विवेक की बातचीत का एक अहम पहलू यह था कि उन्होंने पोस्टपार्टम समय को केवल शारीरिक रिकवरी तक सीमित नहीं माना।
बच्चे के जन्म के बाद मां की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ जाती हैं। नींद का पैटर्न बदल सकता है और शरीर में होने वाले बदलावों के साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी महसूस हो सकते हैं।
ऐसे समय में मां पर तुरंत पहले जैसी दिनचर्या में लौटने या अपने शरीर को लेकर किसी तरह का दबाव बनाने के बजाय उसे समय, आराम और भावनात्मक सहयोग देना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
दिव्यांका और विवेक की नई पैरेंटिंग जर्नी
मई में जुड़वा बेटों के माता-पिता बनने के बाद दिव्यांका और विवेक की जिंदगी में नया अध्याय शुरू हुआ है। दोनों अब बच्चों की देखभाल के साथ अपनी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विवेक का हालिया इंटरव्यू इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि बच्चे के जन्म के बाद बदलाव सिर्फ बच्चे की जिंदगी में नहीं आते, बल्कि माता-पिता के शरीर, मानसिक स्थिति और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
विवेक की बात ने खींचा ध्यान
दिव्यांका की पोस्टपार्टम जर्नी के बारे में विवेक दहिया की खुली बातचीत ने इस विषय को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर उन्होंने पोस्टपार्टम डिप्रेशन और डिलीवरी के बाद होने वाले शारीरिक बदलावों को लेकर खुलकर बात की।
उनकी बात का संदेश यही है कि बच्चे के जन्म के बाद मां को रिकवरी के लिए समय देना और उसके अनुभव को समझना जरूरी है। हर महिला की पोस्टपार्टम जर्नी अलग हो सकती है, इसलिए तुलना करने के बजाय सहयोग और समझ का माहौल बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

