
क्या है दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ का पूरा विवाद? 3 साल तक क्यों अटकी रही फिल्म, 127 कट्स से लेकर OTT से हटने तक की पूरी कहानी
पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म ‘सतलुज’ (पहले ‘पंजाब ’95’) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। करीब तीन साल तक सेंसर बोर्ड और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझी रहने के बाद जब यह फिल्म आखिरकार OTT पर रिलीज हुई, तो महज दो दिन के भीतर ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर फिल्म सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवेदनशील विषयों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर बहस छेड़ दी है।
दरअसल, निर्देशक हनी त्रेहान की इस फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित है। खालरा ने 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर किया था। इसी संवेदनशील विषय के कारण फिल्म शुरुआत से ही विवादों में रही।
फिल्म को वर्ष 2022 में प्रमाणन के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास भेजा गया था। निर्माताओं का दावा था कि बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स लगाने, कुछ संवाद और दृश्य हटाने तथा फिल्म का शीर्षक बदलने का सुझाव दिया। इन मांगों के चलते फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं मिल सका और इसकी रिलीज लगातार टलती रही। बाद में यह मामला कानूनी स्तर तक भी पहुंचा।
विवाद केवल कट्स तक ही सीमित नहीं रहा। फिल्म का नाम भी कई बार बदला गया। पहले इसे ‘घल्लूघारा’ नाम दिया गया था, फिर ‘पंजाब ’95’ रखा गया और आखिरकार OTT रिलीज से पहले इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया। 2023 में इसका प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में होना था, लेकिन वह भी नहीं हो सका। इसके बाद फिल्म लगभग तीन वर्षों तक रिलीज का इंतजार करती रही।
करीब तीन साल की देरी के बाद फिल्म 3 जुलाई 2026 को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई। रिलीज के दौरान दिलजीत दोसांझ और निर्देशक हनी त्रेहान ने स्पष्ट किया कि फिल्म को बिना किसी कट के स्ट्रीम किया गया है। दिलजीत ने यह भी कहा कि अगर फिल्म में एक भी कट लगाया गया होता तो वह इसके प्रचार का हिस्सा नहीं बनते।
हालांकि, रिलीज के केवल दो दिन बाद ही ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि ‘वर्तमान परिस्थितियों’ के चलते फिल्म को भारत में अगले आदेश तक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए कानूनी विकल्पों पर काम कर रहा है। हालांकि हटाए जाने की सटीक वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई।
फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। वहीं दिलजीत दोसांझ ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया कि वह इस घटनाक्रम से निराश हैं, लेकिन अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटेंगे।
‘सतलुज’ का विवाद अब केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप, संवेदनशील ऐतिहासिक विषयों और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है। तीन साल की लंबी प्रतीक्षा, 127 कथित कट्स की मांग, कई बार नाम बदलने की मजबूरी और रिलीज के दो दिन बाद OTT से हटाए जाने की घटना ने इस फिल्म को हाल के वर्षों की सबसे चर्चित और विवादित फिल्मों में शामिल कर दिया है।

