
आबादी 18%, पानी सिर्फ 4%: क्या भारत बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है?
भारत दुनिया की लगभग 18% आबादी का घर है, लेकिन वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ करीब 4% बताई जाती है। यह असंतुलन आने वाले समय में गंभीर जल संकट की आशंका को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है और शहरीकरण तेज हो रहा है, पानी की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है।
देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग—तीनों क्षेत्रों में पानी की खपत बढ़ने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन गई है। कई बड़े शहर पहले ही गर्मियों में पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं, जिससे भविष्य की तस्वीर और चिंताजनक मानी जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पानी के संरक्षण और प्रबंधन पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में भारत को “जल संकट वाले देशों” की श्रेणी में गिना जा सकता है। वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और बेहतर सिंचाई तकनीकों को अपनाना इस संकट से निपटने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

