
JPSC-JSSC के खिलाफ रांची के आंदोलन को मिला सोनम वांगचुक का समर्थन, जानें- क्या कहा?
रांची: झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अब इस आंदोलन को प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिल गया है। उनके समर्थन के बाद यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि वर्षों से भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और कथित अनियमितताओं के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।
इसी बीच सोनम वांगचुक ने आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में संदेश जारी करते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए और उनकी शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक मांगों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन जारी रखने की अपील की तथा कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी कहा कि सोनम वांगचुक उनके लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने बताया कि वांगचुक के संघर्ष और शांतिपूर्ण आंदोलन की भावना से प्रेरित होकर ही उन्होंने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह और भूख हड़ताल का रास्ता चुना है। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और इसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार से मांग की है कि JPSC और JSSC से जुड़े कथित घोटालों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था लागू की जाए। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक के समर्थन के बाद इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। अब सभी की नजर झारखंड सरकार की अगली प्रतिक्रिया और आंदोलन के आगे के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

