
Gajanana Sankashti Chaturthi 2026: सावन की गजानन संकष्टी चतुर्थी कब? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
नई दिल्ली: भगवान श्रीगणेश को समर्पित गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। सावन मास में पड़ने वाली यह संकष्टी चतुर्थी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है। श्रद्धालु इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत रखते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन व अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करते हैं।
कब है गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026?
वर्ष 2026 में सावन मास की गजानन संकष्टी चतुर्थी 3 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। यह व्रत कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में रखा जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव का होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन और सोमवार का यह दुर्लभ संयोग भगवान शिव एवं श्रीगणेश दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर माना जा रहा है।
चतुर्थी तिथि
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 2 अगस्त 2026, रविवार को रात्रि लगभग 10:42 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 3 अगस्त 2026, सोमवार को रात्रि लगभग 11:18 बजे
चंद्रोदय का समय
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
3 अगस्त 2026 को चंद्रोदय का समय (नई दिल्ली): रात्रि लगभग 8:55 बजे।
नोट: चंद्रोदय का समय आपके शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- प्रातः पूजा: सूर्योदय के बाद से दोपहर तक
- संध्याकालीन पूजा: चंद्र दर्शन से पहले
- व्रत पारण: चंद्रमा को अर्घ्य देने और भगवान गणेश की आरती के बाद
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से भगवान गणेश भक्तों के सभी विघ्न और संकट दूर करते हैं। नौकरी, व्यापार, शिक्षा, विवाह और संतान संबंधी बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में आने वाली यह चतुर्थी भगवान शिव और श्रीगणेश दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर मानी जाती है।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा को लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें।
- दूर्वा, लाल फूल, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- गणेश चालीसा और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर भगवान गणेश की आरती करें और फिर व्रत का पारण करें।
क्या करें और क्या न करें?
- व्रत के दिन क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें और संभव हो तो निर्जला या फलाहार व्रत रखें।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
- पूजा के समय पूरी श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें।
सावन की गजानन संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत सुख, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है।

