‘सुप्रीम कोर्ट की शर्तें मंजूर नहीं’, CJP भड़की, सरकार को दिया अल्टीमेटम

‘सुप्रीम कोर्ट की शर्तें मंजूर नहीं’, CJP भड़की, सरकार को दिया अल्टीमेटम

नई दिल्ली। एंटी पेपर लीक आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और CJP (Cockroach Janta Party) के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद CJP ने साफ कहा है कि अदालत की कुछ शर्तें उनके लिए स्वीकार्य नहीं हैं, क्योंकि उनका दावा है कि ये केंद्र सरकार द्वारा पहले दिए गए आश्वासनों से अलग हैं। संगठन ने सरकार से वादा निभाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया और दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है, लेकिन अदालत के आदेश में पहले से दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। उनका कहना है कि सरकार के साथ हुई बातचीत में सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आश्वासन दिया गया था। ऐसे में मौजूदा आदेश उस सहमति से मेल नहीं खाता।

सौरव दास ने कहा कि सरकार को पहले अपने वादे पूरे करने चाहिए। उनके अनुसार, यदि सरकार आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं करती और छात्रों या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहती है, तो CJP देशव्यापी आंदोलन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होगा। संगठन ने सरकार को इस संबंध में स्पष्ट संदेश देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, सरकार के सूत्रों ने CJP के आरोपों को खारिज किया है। सरकारी पक्ष का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति नरम रुख अपनाने की बात कही गई थी, लेकिन यह आश्वासन उन लोगों पर लागू नहीं होता जिन पर हिंसा या अन्य गंभीर आपराधिक आरोप हैं। सरकार का कहना है कि कानून के दायरे में आने वाले मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर टकराव बढ़ सकता है। यदि सरकार और CJP के बीच सहमति नहीं बनती, तो एंटी पेपर लीक आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तेज हो सकता है। हालांकि, अंतिम स्थिति सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगी

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