
प्रियंका गांधी के बयान का सपा ने किया विरोध, कहा- PM को अधिकार है…
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के एक बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है, जिसने एक गंभीर आपराधिक मामले के दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी प्रियंका गांधी की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों का चयन करने का संवैधानिक अधिकार है। सपा नेताओं का कहना था कि किसी नियुक्ति पर राजनीतिक सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत आरोप लगाने से बचना चाहिए और बहस का केंद्र युवाओं तथा शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे होने चाहिए।
लोकसभा में प्रियंका गांधी ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण हैं और वह उन्हें प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सरकार पर छात्रों के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और कहा कि देश के युवाओं के भविष्य, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी के बयान का विरोध करते हुए कहा कि बिना पर्याप्त आधार के किसी मंत्री के चरित्र पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस से बयान वापस लेने की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद में कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जबकि विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरना जारी रखा। वहीं सरकार ने कहा कि वह परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठा रही है

