
बातचीत से नहीं बनी बात, बढ़ा तनाव! ईरान युद्ध को क्यों मान रहा आखिरी विकल्प? ग्लोबल इकोनॉमी पर मंडराया खतरा
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच अब एक बार फिर हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। कूटनीतिक बातचीत में सफलता नहीं मिलने के बाद युद्ध की आशंका को लेकर दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
ईरान के लिए युद्ध कोई आसान फैसला नहीं है, क्योंकि इससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और आम जनता पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, रणनीतिक दबाव बनाने और अपने हितों की रक्षा के लिए ईरान सैन्य विकल्प को आखिरी हथियार के तौर पर देखता रहा है। क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा चिंताएं भी उसके फैसलों में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
अगर तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार, महंगाई और निवेश पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दुनिया के कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान की कोशिशों को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि किसी बड़े संघर्ष को टाला जा सके।

