
भारत के ये 5 राज्य वर्ल्ड बैंक के ‘अपर-मिडिल इनकम’ क्लब में शामिल, लेकिन यूपी-बिहार अब भी पीछे, जानें पूरी तस्वीर
भारत की अर्थव्यवस्था लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रही है, लेकिन राज्यों के बीच आय और विकास का अंतर अभी भी बड़ा बना हुआ है। हालिया आर्थिक विश्लेषणों के अनुसार, देश के कुछ राज्य प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विश्व बैंक (World Bank) द्वारा निर्धारित ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी के स्तर तक पहुंच चुके हैं, जबकि कई बड़े और आबादी वाले राज्य अभी भी इस स्तर से काफी पीछे हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, Goa, Sikkim, Haryana, Tamil Nadu और Karnataka ऐसे राज्यों में शामिल हैं, जहां प्रति व्यक्ति आय विश्व बैंक की ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी के करीब या उसके अनुरूप मानी जा रही है। इन राज्यों में औद्योगिक विकास, सेवा क्षेत्र का विस्तार, बेहतर निवेश माहौल और अपेक्षाकृत उच्च उत्पादकता ने आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वहीं, Uttar Pradesh और Bihar जैसे बड़े राज्यों में प्रति व्यक्ति आय अभी भी राष्ट्रीय औसत से कम है। इसकी प्रमुख वजह बड़ी आबादी, सीमित औद्योगिकीकरण, कृषि पर अधिक निर्भरता, रोजगार के सीमित अवसर और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां मानी जाती हैं। हालांकि, दोनों राज्यों में हाल के वर्षों में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, निवेश और बुनियादी ढांचे पर तेजी से काम हुआ है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देखने को मिल सकता है।
विश्व बैंक की आय श्रेणियां देशों के लिए निर्धारित की जाती हैं, राज्यों के लिए नहीं। इसलिए राज्यों की तुलना आमतौर पर प्रति व्यक्ति आय के आधार पर की जाती है, ताकि यह समझा जा सके कि उनका आर्थिक स्तर वैश्विक आय वर्गों के मुकाबले कहां खड़ा है। इस तरह की तुलना एक विश्लेषणात्मक अभ्यास होती है, न कि विश्व बैंक द्वारा राज्यों को दिया गया कोई आधिकारिक दर्जा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य अपेक्षाकृत कम आय वाले राज्यों में विनिर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर निरंतर निवेश बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में उनकी प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
भारत की समग्र आर्थिक प्रगति तभी अधिक संतुलित मानी जाएगी, जब तेज़ी से आगे बढ़ रहे राज्यों के साथ-साथ कम आय वाले राज्यों में भी विकास की गति तेज हो और क्षेत्रीय असमानताएं धीरे-धीरे कम हों।

