
गरुड़ पुराण के अनुसार: किन आत्माओं तक यमदूत भी नहीं पहुंचते? विष्णु के पार्षद लेते हैं दायित्व
हिंदू धार्मिक ग्रंथ Garuda Purana में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, कर्म और यमलोक से जुड़े कई विस्तृत वर्णन मिलते हैं। मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद जीव की आत्मा को उसके कर्मों के आधार पर यमराज के दूत लेकर जाते हैं, जहां उसे उसके अच्छे-बुरे कर्मों का फल मिलता है। लेकिन गरुड़ पुराण में कुछ विशेष आत्माओं का उल्लेख मिलता है, जिनके लिए यमदूतों का अधिकार क्षेत्र नहीं माना जाता। ऐसी आत्माओं को सीधे उच्च लोकों की ओर ले जाने का कार्य दिव्य शक्तियों द्वारा किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति जीवन में अत्यंत पुण्यात्मा, सत्यनिष्ठ, भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण समर्पित और धर्मपरायण होता है, उसकी मृत्यु के समय उसे साधारण यमदूत नहीं ले जाते। बल्कि ऐसी आत्माओं को भगवान विष्णु के पार्षद स्वयं लेने आते हैं। यह विश्वास Vishnu के वैष्णव परंपरा से जुड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि भगवान के सच्चे भक्तों को यमलोक की यातनाओं से गुजरना नहीं पड़ता, बल्कि उन्हें सीधे उच्च आध्यात्मिक लोक की ओर ले जाया जाता है।
इसके विपरीत, Yama को न्याय के देवता के रूप में दर्शाया गया है, जो सामान्य जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। लेकिन गरुड़ पुराण की कथाओं में यह भी कहा गया है कि अत्यंत पवित्र आत्माओं के लिए यह प्रक्रिया अलग होती है और उनके लिए दैवीय हस्तक्षेप होता है। हालांकि यह सब धार्मिक और आस्था पर आधारित मान्यताएं हैं, जिनका उद्देश्य मनुष्य को धर्म, सदाचार और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करना है।

