
44 साल पहले जब इजराइल ने पहली बार कब्जाया था ब्यूफोर्ट किला, क्यों मच गया था बड़ा हंगामा?
Beaufort Castle इन दिनों फिर चर्चा में है, क्योंकि इजराइली सेना ने 2026 में एक बार फिर इस रणनीतिक किले पर कब्जा करने का दावा किया है। लेकिन इस किले का इतिहास 44 साल पुरानी उस घटना से जुड़ा है, जब 1982 के लेबनान युद्ध के दौरान इजराइल ने पहली बार यहां सैन्य कार्रवाई की थी।
साल 1982 में इजराइल ने “ऑपरेशन पीस फॉर गैलीली” के तहत लेबनान में प्रवेश किया था। उस समय ब्यूफोर्ट किला Palestine Liberation Organization के लड़ाकों के नियंत्रण में था। इजराइली सेना ने किले पर भारी गोलाबारी और सैन्य अभियान चलाकर कब्जा कर लिया। यह लड़ाई “बैटल ऑफ द ब्यूफोर्ट” के नाम से प्रसिद्ध हुई। हालांकि इजराइल को जीत मिली, लेकिन उसके कई सैनिक मारे गए, जिससे देश के भीतर इस अभियान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।
हंगामे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि आलोचकों का मानना था कि किले पर कब्जे की कीमत बहुत भारी पड़ी। कई सैन्य विशेषज्ञों और राजनीतिक विरोधियों ने सवाल उठाए कि क्या इतनी जानें गंवाकर इस किले को कब्जाना वास्तव में जरूरी था। बाद में यह किला इजराइल की दक्षिण लेबनान में लंबी सैन्य मौजूदगी का प्रतीक बन गया और 2000 तक इजराइली सेना ने यहां अपना बेस बनाए रखा।
ब्यूफोर्ट किले का महत्व उसकी ऊंचाई और भौगोलिक स्थिति के कारण है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह किला दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजराइल के बड़े इलाके पर नजर रखने की क्षमता देता है। यही वजह है कि 1982 में भी यह सैन्य संघर्ष का केंद्र बना था और आज भी इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।

