‘हनुमान अंश’ के बीच चर्चा में आया शिमला का संकट मोचन मंदिर, बाबा नीम करौली से जुड़ी है कहानी

‘हनुमान अंश’ के बीच चर्चा में आया शिमला का संकट मोचन मंदिर, बाबा नीम करौली से जुड़ी है कहानी

 

इन दिनों ‘हनुमान अंश’ फिल्म को लेकर भगवान हनुमान और उनके भक्तों के बीच चर्चा तेज है। इसी बीच हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर भी सुर्खियों में है। शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बना यह मंदिर आज हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, लेकिन इसकी कहानी करीब छह दशक पुरानी बताई जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, 1960 के दशक की शुरुआत में यहां घना चीड़ का जंगल हुआ करता था। इसी दौरान भगवान हनुमान के परम भक्त बाबा नीम करौली महाराज शिमला पहुंचे और इस स्थान पर कुछ समय साधना की। कहा जाता है कि बाबा ने यहां एक छोटी-सी कुटिया बनाकर आध्यात्मिक साधना की और उन्हें इस स्थान पर विशेष आध्यात्मिक अनुभूति हुई।

स्थानीय मान्यताओं और मंदिर से जुड़े इतिहास के अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज की प्रेरणा से वर्ष 1962 में यहां संकट मोचन मंदिर के निर्माण की शुरुआत हुई। कई वर्षों तक चले निर्माण कार्य के बाद 21 जून 1966 को मंदिर का उद्घाटन और मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ। धीरे-धीरे यह मंदिर शिमला के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो गया और आज देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भगवान हनुमान के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान लक्ष्मण, भगवान शिव और भगवान गणेश के मंदिर भी मौजूद हैं। इसके अलावा बाबा नीम करौली महाराज को समर्पित मंदिर भी परिसर में बनाया गया है, जहां भक्त श्रद्धा के साथ दर्शन करते हैं।

बाबा नीम करौली महाराज को 20वीं सदी के प्रमुख संतों में गिना जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में लगभग 1900 के आसपास माना जाता है। बाबा ने अपना जीवन सेवा, भक्ति और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया और भगवान हनुमान के प्रति उनकी विशेष श्रद्धा थी। 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनका महाप्रयाण हुआ, लेकिन आज भी भारत और विदेशों में उनके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित संकट मोचन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ शिमला की प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। मंदिर से आसपास की पहाड़ियों और शिमला शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। ऐसे में ‘हनुमान अंश’ के जरिए हनुमान भक्ति की चर्चा के बीच संकट मोचन मंदिर और बाबा नीम करौली महाराज से जुड़ी यह कहानी श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखती है।

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